Category: स्वास्थ्य

  • डीजेजेस एवं एनबीएफ के विशेष महिला सत्र एवं कैंप के माध्यम से सैकड़ों हुए लाभान्वित , पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेशर ने किया जागरूक

    डीजेजेस एवं एनबीएफ के विशेष महिला सत्र एवं कैंप के माध्यम से सैकड़ों हुए लाभान्वित , पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेशर ने किया जागरूक

    देहरादून।

    दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) एवं नव्य भारत फाउंडेशन (एनबीएफ भारत) द्वारा विशेष नारीशक्ति स्वास्थ्य जागरूकता सत्र एवं निःशुल्क मेगा हेल्थ कैंप (फिजीयोथेरेपी,दंत चिकित्सा ,नेत्र जाँच, रक्त जाँच ,मानसिक स्वास्थ्य परामर्श एवं दवाई वितरण कैंप )दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम, निरंजनपुर , देहरादून में ” मिशन आरोग्य , मिशन चिरंजीवी भारत एवं मिशन अपर्णा शक्ति“ के अंतर्गत आम जनमानस के लिए आयोजित करवाया गया , जिसमें पीजीआई चंडीगढ एवं दून अस्पताल के कुशल व अनुभवी डॉक्टर्स द्वारा निशुल्क उपचार किया गया।

    कैंप का उद्घाटन श्रीमती कुसुम कंडवाल जी राज्यमंत्री ( अध्यक्ष , महिला आयोग) उत्तराखंड सरकार जी द्वारा किया गया व उन्होंने डीजेजेएस एवं एनबीएफ को इस दैवीय कार्य के लिए शुभकामनाऐ प्रेषित की व दिव्य गुरू श्री आशुतोष महाराज जी के चरणों में नमन अर्पित किया,मुख्य वक्ता के नाते प्रो० शालिनी गेंडर, कंसलटेंट, स्त्री रोग विभाग, पीजीआई चंडीगढ़ जी ने महिलाओं को ‘महिला शक्ति व स्वास्थ्य ‘ विषय पर संबोधित किया व स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के टिप्स देकर , वूमेन हेल्थ का महत्त्व समझाया एवं सभी से निरोगी जीवन रहने के लिए जागरूक किया व महिलाओं की शंकाओं का समाधान किया ।

    इस मोके पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान , उत्तराखंड की संयोजक साध्वी सुश्री अरूणिमा भारती जी ने बताया कि स्वस्थ तन से ही स्वस्थ मन का निवास होता है,इसी से मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर सकता है और यह विशेष सत्र दिव्य गुरू श्री आशुतोष महाराज जी के विशेष अनुकंपा से ही संपन्न हो पाया है,साथ ही एनबीएफ के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पीजीआई चंडीगढ़ के फिजीयोथेरेपीसट डा० अनिरुद्ध उनियाल जी द्वारा आमजनमानस का निशुल्क फिजीयोथेरेपी परामर्श किया गया और सभी आमजनमानस सदा निरोगी रहे यह ईश्वर से प्रार्थना की।

    कैंप में,डा० योगेश्वरी, दंत चिकित्सक , गवर्मेंट दून अस्पताल ,डा० कल्याण सिंह , नेत्र सर्जन , राही नेत्रधाम , डा० वीणा कृष्णन, मनोवैज्ञानिक सलाहकार जी द्वारा निःशुल्क परामर्श किया गया, साथ ही श्री आशिष सैनी जी ,सिटी मेडिकल स्टोर द्वारा निशुल्क औषधी वितरण,नव्य भारत रेडकलिफ कलेक्शन सेंटर, बालावाला देहरादून द्वारा चैरीटैबल दाम में रक्त जाँच सेवाएँ प्रदान की गई ।इस मौके पर साध्वी जाह्नवी भारती जी, सिमरन कौर , श्री सचिन जौली जी ,श्री आकाश ठाकुर जी ,श्री दीपेंद्र वालिया जी,एडवोकेट अंशुमन जोशी जी ,ऋषभ मिश्रा , डा० आंचल ,सौरभ व अन्य कई गण्यमान्य की गरिमामयी उपस्थिति रही व इस कैम्प के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद लाभान्वित हुए ।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, डोईवाला, जनपद देहरादून

    सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, डोईवाला, जनपद देहरादून

    देहरादून।

    सेवा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर का सफल समापन, अंतिम दिवस पर भी सैकड़ों लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

    सेवा सप्ताह के अंतर्गत 10 जुलाई से 12 जुलाई 2026 तक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, डोईवाला में आयोजित तीन दिवसीय विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिवस पर भी क्षेत्र के नागरिकों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श, जांच एवं उपचार का लाभ प्राप्त किया। शिविर में आयुष्मान भारत, एबीएचए, राष्ट्रीय गैर संचारी रोग (एनसीडी), टीबी उन्मूलन, टीकाकरण, आरकेएसके, आयुष एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत भी व्यापक सेवाएं प्रदान की गईं।

    शिविर के अंतिम दिवस प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कुल 230 मरीजों (पुरुष 104, महिला 126) का सामान्य ओपीडी में परीक्षण एवं उपचार किया गया।

    विशेषज्ञ विभागों में फिजिशियन विभाग में 126, स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभाग में 67, अल्ट्रासाउंड (यूएसजी) में 30, आयुष ओपीडी में 26, आरकेएसके काउंसलिंग में 26, नेत्र रोग विभाग में 23, बाल रोग विभाग में 13, दंत चिकित्सा विभाग में 12, ईएनटी विभाग में 5 तथा सर्जरी विभाग में 4 मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार प्रदान किया गया।

    एनसीडी स्क्रीनिंग के अंतर्गत 59 व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें 12 उच्च रक्तचाप (HTN) एवं 11 मधुमेह (Diabetes) के संभावित मरीजों की पहचान की गई। टीबी स्क्रीनिंग के अंतर्गत 120 व्यक्तियों की जांच की गई तथा 4 निक्षय मित्र लाभार्थियों को सेवाओं से जोड़ा गया।

    प्रयोगशाला में एलएफटी (09), केएफटी (21), लिपिड प्रोफाइल (10), हीमोग्लोबिन (22), आरबीएस (80) सहित विभिन्न जांचें की गईं। इसके अतिरिक्त बलगम जांच, 51 एक्स-रे, 30 अल्ट्रासाउंड (यूएसजी) एवं 1 ईसीजी जांच भी की गई।

    शिविर के दौरान 98 एबीएचए आईडी बनाई गईं तथा 2 आयुष्मान भारत कार्ड तैयार किए गए। इसके अतिरिक्त गर्भवती महिला एवं बच्चों का टीकाकरण, एसटीआई/आरटीआई परामर्श तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

    तीन दिवसीय विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर के सफल आयोजन में चिकित्सकों, विशेषज्ञों, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम एवं समस्त स्वास्थ्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, डोईवाला के चिकित्सा अधीक्षक ने शिविर के सफल संचालन में सहयोग प्रदान करने वाले जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा।

  • समाधान दिवस में मिला त्वरित न्याय, डीएम की संवेदनशीलता से दिव्यांग सुनील को मिली पेंशन, बैंक खाता और नई व्हीलचेयर

    समाधान दिवस में मिला त्वरित न्याय, डीएम की संवेदनशीलता से दिव्यांग सुनील को मिली पेंशन, बैंक खाता और नई व्हीलचेयर

     

    *देहरादून,
    जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। अपर नत्थनपुर निवासी दिव्यांग सुनील चन्द्र, जो लंबे समय से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे, अब उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र, मासिक दिव्यांग पेंशन, बैंक खाता और निःशुल्क व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध हो गई है।

    सुनील चन्द्र व्हीलचेयर के सहारे किसी तरह 29 जून को समाधान दिवस में पहुंचे और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि ‘‘साहेब में बहुत गरीब हूं। शरीर से लाचार हूं। आज तक मेरा दिव्यांग प्रमाण पत्र नही बन पाया। कोई सरकारी मदद नहीं मिलती, बस जैसे-तैसे जी रहा हूं।’’

    दिव्यांग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ‘‘इस व्यक्ति को तुरंत अपनी गाड़ी से कोरोनेशन अस्पताल ले जाइए। आज ही इनकी मेडिकल जांच होगी और आज ही इनका दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।” साथ ही समाज कल्याण अधिकारी को हिदायत दी गई कि वे तहसील प्रशासन से तालमेल बैठाकर तुरंत सुनील का आय प्रमाण पत्र तैयार करवाएं और पेंशन की फाइल आगे बढ़ाएं।

    जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल जांच के उपरांत सुनील चन्द्र को 45 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया गया। समाज कल्याण विभाग ने तहसीलदार सदर के माध्यम से उनका आय प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसके बाद विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए अगस्त माह से उनकी दिव्यांग पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।

    लेकिन कहानी यही खत्म नहीं हुई। जांच में सामने आया कि सुनील चन्द्र का कोई बैंक खाता ही नहीं है। बिना खाते के पेंशन की रकम कैसे आती? ऐसे में प्रशासन ने इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया। बैंक के कर्मचारी खुद चलकर सुनील के घर पहुंचे और उनके चौखट पर ही उनका बैंक खाता भी खोला गया।

    समाज कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सुनील चंद्र के लिए आगामी अगस्त महीने से दिव्यांग पेंशन स्वीकृत कर दी है। इतना ही नहीं, उनको निःशुल्क व्हीलचेयर भी उपलब्ध करा दी है।

    प्रशासन के इस बदले और मददगार रूप को देखकर आज सुनील चन्द्र गदगद हैं। कभी दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से सहमे रहने वाले सुनील ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और पूरी टीम का दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ है कि सरकार सचमुच गरीबों के द्वार पर खड़ी है।

     

  • हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा स्वास्थ्य सेवा पहल के तहत् आयोजित शिविरों में 1100 से अधिक ग्रामीण लाभान्वित

    हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा स्वास्थ्य सेवा पहल के तहत् आयोजित शिविरों में 1100 से अधिक ग्रामीण लाभान्वित

     

    पंतनगर-हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा सीएसआर के तहत् स्वास्थ्य सेवा पहल के अंतर्गत ममता एचआईएमसी के सहयोग से राजस्थान और उत्तराखंड के प्रमुख क्षेत्रों आगुचा, चंदेरीया, जावर, दरिबा और पंतनगर में स्वास्थ्य शिविर सफलतापूर्वक आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से कुल 1100 से अधिक लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं, जिनमें 561 महिलाएं और 540 पुरुष शामिल थे।

    लाभार्थियों की सुविधा और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए डोर-टू-डोर परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, ताकि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

    इन शिविरों में गायनेकोलॉजिस्ट, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और जनरल फिजीशियन की टीम मौजूद रही, जिन्होंने लाभार्थियों को व्यक्तिगत और व्यापक परामर्श प्रदान किया। शिविरों में हीमोग्लोबिन जांच, रक्तचाप मापन और रैंडम ब्लड शुगर स्क्रीनिंग जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं, जिससे तत्काल राहत और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित हुई।

    यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए एक सशक्त और प्रभावशाली मॉडल साबित हुई है। इसने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर किया, जागरूकता और रोकथाम को बढ़ावा दिया, और लोगों को समय पर उपचार लेने के लिए प्रेरित किया। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और और ममता एचआईएमसी का यह प्रयास जमीनी स्तर पर सार्थक और स्थायी बदलाव ला रहा है, जिससे समुदाय स्वस्थ, मजबूत और सशक्त बन रहा है।

  • हाईरिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं से डीएम दूरभाष पर पूछा हाल, सीएमओ को मॉनिटिरिंग करने के निर्देश

    हाईरिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं से डीएम दूरभाष पर पूछा हाल, सीएमओ को मॉनिटिरिंग करने के निर्देश

     

    *देहरादून,
    जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में आगामी मानसून के दृष्टिगत शहर क्षेत्र में आवश्यक व्यवस्थाओं, सड़क सुरक्षा, जल निकासी, विद्युत व्यवस्था एवं जनसुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को मानसून अवधि में सतर्कता बरतते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
    जिलाधिकारी ने रिस्पना एवं बिंदाल नदी किनारे निवासरत लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था एवं मानसून के दृष्टिगत नालियों/नालों की सफाई कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी प्रमुख नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर पूर्व में ही आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभगा के अधिकारियों को शहर में नहर एवं अण्डरग्राउंड नहर के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।
    बैठक में जिलाधिकारी ने शहर क्षेत्र में रोड कटिंग के उपरांत सड़क रिस्टोरेशन कार्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए सड़क कटिंग के बाद तत्काल मरम्मत कार्य पूर्ण करें, ताकि आमजन को आवागमन में असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने मानसून के दौरान सड़कों पर उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं के समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान खोदी गई सड़कों को पुर्नस्थापित करने के निर्देश साथ ही चेतावनी दी तथा सदस्य सचिव सड़क सुरक्षा समिति अधीक्षण अभियंता लोनिवि, नगर निगम, यूयूएसडीए संचालित निर्माण कार्यों स्थलीय निरीक्षण करते हुए आख्या प्रस्तुत करने तथा सड़क को तत्काल गुड्डामुक्त करते हुए यातायात हेतु सुरक्षित करने के निर्देश दिए। साथ ही गेल द्वारा संचालित कार्यों में सुरक्षा मानकों की लापरवाही बरतने की शिकायत पर सम्बन्धित ठेकेदार के विरूद्ध अर्थदण्ड की कार्यवाही करने तथा पुनरावृत्ति होने पर ब्लैकलिस्ट की चेतावनी दी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया किया यदि सड़क पर गड्डो से यदि कोई दुर्घटना होती है अथवा जानमाल की हानि होती है तो सम्बन्धित की जिम्मेदारी तय करते हुए विधिक कार्यवाही की जाएगी।
    बैठक में डेंगू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग, लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान प्रभावी रूप से संचालित किए जाएं। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को जिले में अवस्थित समस्त स्कूलों में डेंगू, मलेरिया सुरक्षा के दृष्टिगत बच्चों को फूल बाजू की डेªस में आने की व्यवस्था लागू करने के साथ ही डेंगे मलेरिया से जनमानस को जागरूक करने हेतु जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मानसून सीजन के दृष्टिगत दुर्गम क्षेत्रों में हाईरिस्क प्रेगनेंसी, गर्भवती महिलाओं से दूरभाष पर वार्ता कर उनका हॉल चाल जाना तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के निरंतर मॉनिटिरिंग की जाए, निर्देशित किया कि महिलाओं को प्रसव तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही नजदीकि चिकित्सालय सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।
    जिलाधिकारी ने पेयजल निगम एवं जल संस्थान को पानी शुद्वता एवं खाद्य सुरक्षा विभाग को संचालित होटल रेस्टोंरेट में खाने गुणवत्ता एवं की निरंतर जांच कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।
    जिलाधिकारी ने शहर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति की समीक्षा करते हुए खराब एवं बंद पड़ी लाइटों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश नगर निकाय एवं संबंधित विभागों को दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था बेहतर रहना जनसुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीएम ने नगर मजिस्टेªट एवं उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय के अधिकारी अपने क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईटों का निरीक्षण करते हुए खराब स्ट्रीट लाईट ठीक कराने तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईट नही है वहां स्ट्रीट लाईट लगवाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी स्वयं इसकी मॉनिटिरिंग कर रहे हैं। बैठक में शहर क्षेत्र में संचालित रैनबसेरों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी रैनबसेरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर आश्रय एवं अन्य सुविधाएं मिल सकें। जिलाधिकारी ने शहर में स्थित जर्जर एवं असुरक्षित भवनों के संबंध में की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे भवनों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा ऋतु में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके, नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि नगर में 23 भवन चिन्हिकरण किए गए है जिस पर जिलाधिकारी ने कहा कि मा0 न्यायालय में लम्बित वाद वालें भवनों को छोड़कर जनसुरक्षा के दृष्टिगत ऐसे शेष भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत् ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाए।
    बैठक में विद्युत पोलों, आवासीय भवनों एवं वृक्षों से सटे अथवा लटकते विद्युत तारों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ढीले एवं असुरक्षित तार जनसुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यूपीसीएल के अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र चिन्हित करते हुए केबल भूमिगत कराने के कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने तथा विद्युत लाईन की स्थिति तथा मानसून के दृष्टिगत खराब विद्युत लाईन चिन्हीकरण एवं सुधारीकरण कार्य हेतु टास्कफोर्स बनाने के निर्देश दिए।
    जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
    बैठक में अपर जिलाधिकारी वि/रा के.के मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 मनोज शर्मा, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओमपाल सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, जिला प्रशासन ने तेज की निगरानी

    बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, जिला प्रशासन ने तेज की निगरानी

     

    *देहरादून,
    जनपद देहरादून में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक में पिछले एक साल की कार्रवाई की समीक्षा की गई, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच जिले में कुल 486 औचक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई की गई। इस सघन अभियान के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से 28 बाल श्रमिकों और 12 किशोर श्रमिकों सहित कुल 40 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया है।

    सहायक श्रम आयुक्त शैलेस सती की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बताया गया कि मुक्त कराए गए सभी 40 बच्चों को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। प्रशासन इन बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

    *दोषी नियोक्ताओं पर कसा शिकंजा, ₹20,000 की वसूली*
    मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशों का कड़ा अनुपालन करते हुए टास्क फोर्स ने दोषी नियोक्ताओं के खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई भी की है। रेस्क्यू किए गए मामलों में से चिन्हित नियोक्ताओं से 20-20 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति धनराशि वसूल की जा चुकी है। 12 मामलों में सुनवाई के दौरान आयु प्रमाण पत्र के आधार पर श्रमिक बाल श्रम की श्रेणी से बाहर पाए गए, जिसके चलते उन पर वसूली की कार्रवाई नहीं की गई। 05 मामलों में नए आदेश जारी किए गए हैं, जबकि 02 मामलों में जुर्माना वसूली के लिए जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजा गया है। शेष 08 मामलों में कानूनी कार्रवाई अभी गतिमान है।

    सहायक श्रम आयुक्त शैलेष सती ने स्पष्ट किया कि ‘बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986’ के नए संशोधन के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी खतरनाक या गैर-खतरनाक काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने वाले दोषियों को 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 20 हजार रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।

    *संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी*
    बैठक में सहायक श्रम आयुक्त ने पुलिस, श्रम विभाग और अन्य सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का प्रचार प्रसार के साथ सघन जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग बाल श्रम के खिलाफ जागरूक हो सकें।

    इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, रीजनल लेबर कमिश्नर दिनेश कुमार, सीएचएल समन्वयक साक्षी भंडारी, आसरा ट्रस्ट से अक्षित नौटियाल और जिला टास्क फोर्स व बाल कल्याण समिति के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

     

  • चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में 27 वर्षीय हार्ट अटैक मरीज की अत्याधुनिक बायोएब्जॉर्बेबल स्टेंट से सफल एंजियोप्लास्टी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव के नेतृत्व में हुआ उपचार

    चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में 27 वर्षीय हार्ट अटैक मरीज की अत्याधुनिक बायोएब्जॉर्बेबल स्टेंट से सफल एंजियोप्लास्टी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव के नेतृत्व में हुआ उपचार

     

    हल्द्वानी, : चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी के कार्डियोलॉजी विभाग ने 27 वर्षीय हार्ट अटैक (NSTEMI) मरीज का अत्याधुनिक बायोएब्जॉर्बेबल स्टेंट (Bioabsorbable Scaffold) की सहायता से सफल उपचार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। मरीज को हार्ट अटैक (NSTEMI) के बाद अस्पताल लाया गया था, जहाँ जांच में हृदय की प्रमुख धमनी एलएडी (LAD) में गंभीर रुकावट पाई गई।
    हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव के नेतृत्व में उन्नत IVUS (Intravascular Ultrasound) तकनीक की सहायता से अत्यंत सटीकता के साथ एंजियोप्लास्टी की गई और बायोएब्जॉर्बेबल स्टेंट प्रत्यारोपित किया गया। प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और हृदय की धमनी में रक्त प्रवाह सामान्य रूप से बहाल हो गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही और उसे आवश्यक दवाइयों एवं जीवनशैली संबंधी सलाह के साथ स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
    इस अवसर पर डॉ. गौरव यादव ने कहा, “युवा मरीजों में हृदय रोग का उपचार केवल तत्काल जान बचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके दीर्घकालिक हृदय स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। बायोएब्जॉर्बेबल स्टेंट एक आधुनिक तकनीक है, जो कुछ वर्षों में धीरे-धीरे शरीर में अवशोषित हो जाता है और धमनी में स्थायी धातु नहीं छोड़ता। उचित मरीज का चयन, IVUS-निर्देशित सटीक प्रत्यारोपण और नियमित फॉलो-अप से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।”
    विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कम उम्र में भी हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में सीने में दर्द, अत्यधिक पसीना, सांस फूलना या बेचैनी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर उपचार से अधिकांश मरीजों का सफल इलाज संभव है।
    यह सफल प्रक्रिया चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में उपलब्ध आधुनिक कार्डियक सुविधाओं और उन्नत इंटरवेंशनल तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो क्षेत्र के मरीजों को महानगरों जैसी उच्चस्तरीय हृदय चिकित्सा उपलब्ध करा रही हैं।

  • मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉक्टरों ने 19 साल की युवती का रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया

    मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉक्टरों ने 19 साल की युवती का रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया

     

    देहरादून, : देहरादून की 19 साल की युवती, जिसकी दोनों किडनियों ने लगभग काम करना बंद कर दिया था और वह नियमित डायलिसिस पर निर्भर थी, उसका मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून में रोबोटिक तकनीक से सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। इस सफल ऑपरेशन के बाद युवती को नया जीवन मिला है।
    युवती पिछले लगभग एक साल से आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों से होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित थी। बीमारी बढ़ने के साथ उसकी दोनों किडनियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर चुकी थीं, जिसके कारण उसे नियमित डायलिसिस करवाना पड़ रहा था। स्थायी इलाज के लिए वह मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून पहुंची, जहां डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी।
    मां के प्यार और त्याग की मिसाल पेश करते हुए युवती की 42 वर्षीय मां ने अपनी एक किडनी दान करने का फैसला किया। सभी जरूरी मेडिकल जांच के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि उनकी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की तैयारी शुरू की।
    यह मामला डॉक्टरों के लिए इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि युवती का वजन सामान्य से काफी अधिक था। ऐसे मरीजों में पारंपरिक (ओपन) सर्जरी के दौरान घाव में संक्रमण, अधिक दर्द और ठीक होने में अधिक समय लगने का जोखिम रहता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया।
    अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की मदद से डॉक्टरों ने छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया। इससे ऑपरेशन अधिक सटीक तरीके से किया जा सका, शरीर को कम नुकसान पहुंचा, दर्द भी कम हुआ और मरीज तेजी से स्वस्थ हो सकी। किडनी ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल रहा और मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही।
    इस उपलब्धि पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉ. दीपक गर्ग ने कहा, “रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट जटिल किडनी ट्रांसप्लांट के तरीके को बदल रहा है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनका वजन अधिक है या जिनमें सामान्य सर्जरी का खतरा ज्यादा होता है। इस तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है और मरीज पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में जल्दी स्वस्थ हो सकता है।”
    उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को नियमित रूप से डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। साथ ही, नई किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जीवनभर जरूरी दवाइयां लेनी होंगी, स्वस्थ जीवनशैली अपनानी होगी और संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी।
    मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून में किया गया यह सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट अस्पताल की उन्नत ट्रांसप्लांट सेवाओं की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को विश्वस्तरीय रोबोटिक ट्रांसप्लांट की सुविधा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो रही है।

  • लाल पुल बस दुर्घटना की होगी मजिस्ट्रियल जांच, एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के डीएम ने दिए निर्देश

    लाल पुल बस दुर्घटना की होगी मजिस्ट्रियल जांच, एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के डीएम ने दिए निर्देश

     

    *देहरादून,
    जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने 23 जून 2026 को सहारनपुर रोड स्थित लाल पुल के निकट हुई बस दुर्घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु तथा चार अन्य के घायल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए, जिलाधिकारी द्वारा, उप जिलाधिकारी (सदर) देहरादून को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

    जारी आदेश के अनुसार 23 जून 2026 को लगभग प्रातः 11 बजे वाहन संख्या UK07PA-0287 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में राजीवनगर, पटेलनगर निवासी आहद (22 वर्ष) की मृत्यु हो गई, जबकि चार अन्य व्यक्ति घायल हुए। संबंधित वाहन नगर बस सार्वजनिक सेवायान की श्रेणी में संचालित है।

    जिलाधिकारी ने जांच अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की गहन एवं निष्पक्ष जांच करते हुए एक सप्ताह के भीतर अपनी आख्या प्रस्तुत करें।

    जांच के दौरान दुर्घटना के कारणों, वाहन में चालक सहित सवार यात्रियों की संख्या, मृतक एवं घायलों का वास्तविक विवरण, घायलों की चिकित्सकीय स्थिति, मृतक के उत्तराधिकारियों का विवरण, परिवहन विभाग की तकनीकी रिपोर्ट, वाहन के कर एवं मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन तथा भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुझावों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
    जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। उक्त के घटना के संबंध में यदि किसी व्यक्ति को लिखित एवं मौखिक रूप में कोई साक्ष्य प्रस्तुत करने हैं अथवा कोई जानकारी देनी है वह एक सप्ताह के भीतर उप जिलाधिकारी सदर के कार्यालय एवं न्यायालय में किसी भी कार्य दिवस में उपस्थित प्रस्तुत कर सकते हैं।

  • उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी उपकरणों का सुदृढ़ आधार

    उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी उपकरणों का सुदृढ़ आधार

     

     

    देहरादून।

    उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार के बीच सोमवार को कर्तव्य भवन, नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

    समझौते पर उत्तराखंड शासन की ओर से स्वास्थ्य सचिव श्री विनय शंकर पांडे तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव सुश्री आराधना पटनायक की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

    इस समझौते के अंतर्गत प्रधानमंत्री निधि के माध्यम से उत्तराखंड को 4 एमआरआई (MRI) मशीनें, 5 डिजिटल मैमोग्राफी (DBT) मशीनें तथा 75 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।

    इन अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों के उपलब्ध होने से प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में जांच सुविधाओं का विस्तार होगा तथा रोगों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निदान में उल्लेखनीय सहायता मिलेगी। विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से मरीजों को उनके निकट ही बेहतर जांच एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव होगा।

    इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक श्री संदीप तिवारी सहित भारत सरकार एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।