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  • ईबीजी समूह की ईबाइकगो अगले 12 महीनों में पूरे भारत में 50 एकीकृत साइकिल स्टोर शुरू करेगी

    ईबीजी समूह की ईबाइकगो अगले 12 महीनों में पूरे भारत में 50 एकीकृत साइकिल स्टोर शुरू करेगी

     

     

    देहरादून, : ईबाइकगो, ईबीजी समूह की एक कंपनी, ने आज अगले 12 महीनों में पूरे भारत में 50 एकीकृत स्टोर स्थापित करने की योजना की घोषणा की। यह पहल भारत के संगठित साइकिल मोबिलिटी रिटेल और सर्विस क्षेत्र में कंपनी के प्रवेश को चिह्नित करती है। इस पहल के तहत साइकिल और इलेक्ट्रिक साइकिल की बिक्री, रेंटल, सर्विसिंग, स्पेयर पार्ट्स और फ्लीट मोबिलिटी सॉल्यूशंस को एक ही रिटेल मॉडल के अंतर्गत लाया जाएगा, जिसका उद्देश्य रोजमर्रा के शहरी आवागमन के लिए साइकिल-आधारित मोबिलिटी को अधिक सुलभ बनाना है।

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब साइकिल और इलेक्ट्रिक साइकिल को अब केवल फिटनेस और मनोरंजन के साधन के रूप में ही नहीं, बल्कि कम दूरी के आवागमन, छात्रों की मोबिलिटी, लास्ट-माइल ट्रैवल और गिग वर्क के लिए भी तेजी से अपनाया जा रहा है। ऐसे उपयोगों में किफायती कीमत, संचालन लागत, सुविधा और विश्वसनीय सर्विसिंग की उपलब्धता इनके उपयोग को प्रभावित कर सकती है। ईबाइकगो का मॉडल इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसे पड़ोस-आधारित स्टोर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जहां उत्पादों की उपलब्धता के साथ रेंटल और बिक्री के बाद की सेवाएं भी एक ही स्थान पर मिलेंगी।

    ग्रुप 50-स्टोर नेटवर्क स्थापित करने के लिए ₹35 करोड़ से अधिक का निवेश करने की योजना बना रहा है। नेटवर्क के पूरी तरह विकसित होने पर इस कार्यक्रम से 300 प्रत्यक्ष नौकरियों और 500–700 अप्रत्यक्ष आजीविका के अवसरों को समर्थन मिलने की उम्मीद है। कंपनी को बिक्री, रेंटल और सर्विसिंग के माध्यम से हर वर्ष 5 लाख से अधिक ग्राहक इंटरैक्शन और 1 लाख से अधिक मोबिलिटी ट्रांजैक्शन होने का भी अनुमान है।

    ईबीजी समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. इरफान खान ने कहा: “भारत में इलेक्ट्रिक साइकिल को लेकर लोगों की धारणा बदल रही है। अब इसे केवल फिटनेस या मनोरंजन से जुड़े उत्पाद के रूप में नहीं देखा जा रहा है। ऑफिस जाने वाले व्यक्ति, छात्र या गिग वर्कर के लिए चर्चा अब तेजी से प्रति किलोमीटर लागत, सुविधा, विश्वसनीयता और सर्विस की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर केंद्रित हो रही है। यही वह क्षेत्र है जहां एक संगठित रिटेल और सर्विस इकोसिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईबाइकगो Stores के माध्यम से हमारा उद्देश्य इलेक्ट्रिक और पारंपरिक साइकिलों को अधिक सुलभ बनाना है, साथ ही बिक्री के बाद भी ग्राहक के स्वामित्व अनुभव को बेहतर बनाना है।”

    इस विस्तार की शुरुआत कोयंबटूर, हैदराबाद और बेंगलुरु के पायलट बाजारों से होगी। यहां ईबाइकगो अतिरिक्त बाजारों में विस्तार करने से पहले अपने ऑपरेटिंग मॉडल का परीक्षण और उसमें सुधार करेगी। कंपनी मेट्रो-फर्स्ट, क्लस्टर-आधारित रणनीति के तहत आगे बढ़ेगी। शुरुआती 15 फाउंडिंग स्टोर नेटवर्क की प्रारंभिक उपस्थिति स्थापित करेंगे और कंपनी को ऑपरेशनल डेंसिटी विकसित करने, उत्पादों की उपलब्धता मजबूत करने तथा बिक्री के बाद की सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

    पारंपरिक साइकिल डीलरशिप के विपरीत, ईबाइकगो Stores को पड़ोस-आधारित मोबिलिटी हब के रूप में विकसित किया गया है, जहां रिटेल, रेंटल, सर्विसिंग और फ्लीट सपोर्ट एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। ये स्टोर बच्चों, छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, फिटनेस प्रेमियों, परिवारों, गिग वर्कर्स, डिलीवरी पार्टनर्स, व्यवसायों और संस्थागत ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करेंगे।

    स्टोर store.ebikego.com से जुड़े होंगे, जिससे ट्रांजैक्शन और ग्राहक सहायता के लिए एक साझा टेक्नोलॉजी लेयर तैयार होगी। इस पेशकश के केंद्र में 250W इलेक्ट्रिक-असिस्ट साइकिलों का पोर्टफोलियो है, जिन्हें कम्यूटिंग, फोल्डेबल अर्बन मोबिलिटी, गिग-वर्क एप्लिकेशंस और प्रीमियम रिक्रिएशनल राइडिंग के लिए डिजाइन किया गया है। प्रस्तावित रेंज में eBikeGo City, eBikeGo Flare, eBikeGo Flare Pro, eBikeGo Fold, eBikeGo Momentum और eBikeGo Horizon शामिल हैं। पूरे पोर्टफोलियो में मौजूदा प्रोडक्ट आर्किटेक्चर में मॉडल और राइडिंग मोड के आधार पर 25 किमी/घंटा तक की असिस्टेड स्पीड, अनुमानित 35–55 किमी की रेंज, रिमूवेबल बैटरियां, चुनिंदा मॉडलों में Shimano गियरिंग और फोल्डेबल डिजाइन शामिल हैं। कंपनी का दीर्घकालिक विजन 1,500 से अधिक स्टोर वाला राष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क तैयार करना है। इसके लिए पूंजी-कुशल और पार्टनर-आधारित विस्तार मॉडल अपनाने की योजना है, जिसका उद्देश्य भारत में साइकिल और इलेक्ट्रिक साइकिल को रोजमर्रा के शहरी परिवहन का एक व्यावहारिक हिस्सा बनाना है।

  • जनपद हरिद्वार में जिला योजना समिति के सदस्यों के निर्वाचन हेतु मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया प्रारम्भ

    हरिद्वार

    राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखण्ड की अधिसूचना के क्रम में जिला मजिस्ट्रेट एवं रिटर्निंग अधिकारी (जिला योजना समिति) हरिद्वार मयूर दीक्षित द्वारा जनपद हरिद्वार की जिला योजना समिति के सदस्यों के निर्वाचन हेतु नगर निकायों के निर्वाचित सभासदों एवं सदस्यों की मतदाता सूची तैयार करने के लिए समय-सारिणी जारी की गई है।
    जारी कार्यक्रम के अनुसार नगर निगम हरिद्वार, नगर पालिका परिषद शिवालिक नगर, नगर निगम रुड़की, नगर पंचायत पाडली गुज्जर, रामपुर, बेहड़ेकी सैदाबाद, नगर पालिका परिषद मंगलौर, नगर पंचायत झबरेड़ा, नगर पालिका परिषद लक्सर, नगर पंचायत सुल्तानपुर आदमपुर, लण्ढौरा, पिरान कलियर, भगवानपुर एवं इमलीखेड़ा के निर्वाचित सभासदों एवं सदस्यों की निर्वाचक नामावली तैयार की जाएगी।
    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 08 सितम्बर 2026 को निर्वाचक नामावली के आलेख्य का प्रकाशन किया जाएगा। 10 सितम्बर 2026 तक संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि नामावली का निरीक्षण कर दावा एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत कर सकेंगे। प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण 12 सितम्बर 2026 को किया जाएगा तथा 15 सितम्बर 2026 को अंतिम रूप से तैयार निर्वाचक नामावली का प्रकाशन किया जाएगा।
    जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने बताया कि दावा एवं आपत्ति दाखिल करने तथा उनके निस्तारण की समस्त कार्यवाही जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, हरिद्वार में संपन्न होगी। उन्होंने संबंधित नगर निकायों, तहसीलों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उक्त कार्यक्रम को अपने-अपने कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से चस्पा कर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें, जिससे सभी संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय पर जानकारी प्राप्त हो सके।
    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित निर्वाचित सभासदों एवं सदस्यों से निर्धारित समयावधि में निर्वाचक नामावली का अवलोकन कर आवश्यकतानुसार दावा एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अपील की है, ताकि अंतिम मतदाता सूची त्रुटिरहित एवं पारदर्शी रूप से तैयार की जा सके।

  • इस रक्षा बंधन, .पारंपरिक उपहारों से इतर अपने भाई-बहन को एक ख़ास ट्रिप का तोहफ़ा दें

    इस रक्षा बंधन, .पारंपरिक उपहारों से इतर अपने भाई-बहन को एक ख़ास ट्रिप का तोहफ़ा दें

     

    देहरादून- : रक्षाबंधन हमेशा से एक खास त्योहार रहा है जो हमारी परंपराओं से जुड़ा है। हर साल बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, मिठाई खिलाती हैं और एक-दूसरे की रक्षा का वादा करती हैं। लेकिन आज की भागदौड़ और व्यस्त ज़िंदगी में, भाई-बहनों का साथ में समय बिताना कम हो गया है। अब ज़्यादातर बातें जल्दी में की गई वीडियो कॉल, छोटे-मोटे मैसेज या कूरियर से भेजे गए तोहफ़ों तक ही सिमट कर रह गई हैं।

    इसलिए इस बार इस त्योहार को कुछ अलग तरीके से मनाने और आपस में फिर से वही पुराना प्यार महसूस करने के लिए कैलेंडर भी हमारी मदद कर रहा है।

    इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को आ रहा है, जिससे लगातार तीन दिन की छुट्टी (लॉन्ग वीकेंड) मिल रही है। यह छुट्टी बिना किसी तनाव के त्योहार की खुशी बढ़ाने और राखी व मिठाई के साथ किसी अच्छी जगह घूमने जाने का एक बेहतरीन मौका दे रही है।

    यदि आप केवल एक साधारण वस्तु के स्थान पर ऐसा उपहार देने का विचार कर रहे हैं जो जीवन भर याद रहने वाला अनुभव बने, तो आपके इस उत्सव को और समृद्ध बनाने के लिए यहाँ कुछ विशेष रूप से चुने गए विकल्प प्रस्तुत हैं:

    1. फूडी भाई-बहनों के लिए: दिल्ली से जयपुर

    अगर आपका ग्रुप चैट 80% रेस्टोरेंट के सुझावों और 20% इस बहस से भरा रहता है कि आपमें से किसकी खान-पान संबंधी रुचि कमतर है, तो जयपुर ट्रिप आपके लिए ही बनी है। ‘पिंक सिटी’ पारंपरिक राजस्थानी थाली और नए ज़माने के कैफ़े दोनों को बेहतरीन तरीक़े से पेश करती है, जहाँ बिना किसी प्लान के घूमना भी अपने आप एक ‘फ़ूड क्रॉल’ बन जाता है।

    सुबह का समय पुरानी दिल्ली/जयपुर के मशहूर स्ट्रीट फ़ूड स्टॉल्स पर बिताएँ, दोपहर बाज़ारों में ख़रीदारी करते हुए गुज़ारें और दिन का अंत आमेर क़िले के ख़ूबसूरत नज़ारे वाले किसी रूफ़टॉप कैफ़े में करें। दिल्ली से जयपुर का सफ़र भी उतना ही मज़ेदार है, न्यूगो इस रूट पर अपना इंटरसिटी इलेक्ट्रिक कोच चलाता है, जिससे आप ट्रैफ़िक की चिंता किए बिना रास्ते भर अपने फ़ूड प्लान पर बहस कर सकते हैं।

    यादगार पल बनाने के लिए: कोई ऐसी डिश ऑर्डर करें जो आप दोनों में से किसी ने पहले कभी न चखी हो। उसे आपस में बाँटकर खाएँ और वोट के आधार पर हारने वाला सदस्य मिष्ठान का भुगतान करेगा।

    2. समुद्र प्रेमियों के लिए: चेन्नई से पॉन्डिचेरी

    कुछ ट्रिप्स के लिए प्लानिंग की ज़रूरत होती है, लेकिन इस ट्रिप को बिल्कुल बिना किसी प्लान के शुरू करें, सिर्फ़ समुद्र, बेहतरीन कॉफ़ी और आप दोनों का साथ। सरसों के पीले रंग की दीवारों और शांत प्रोमेनेड के साथ पॉन्डिचेरी का ‘फ़्रेंच क्वार्टर’ ख़ास तौर पर उन भाई-बहनों के लिए बना है जो घूमने की जगहें टिक करने से ज़्यादा आपस में बातें करना पसंद करते हैं।

    चेन्नई से पॉन्डिचेरी की दूरी इतनी कम है कि यह एक स्पॉन्टेनियस ट्रिप जैसी लगती है। न्यूगो इस रूट पर भी अपनी इलेक्ट्रिक बसें चलाता है, जिससे आपका सफ़र बिना किसी थकावट के एक सुकून भरे वीकेंड की शुरुआत बन जाता है।

    यादगार पल बनाने के लिए: अपनी सारी प्लानिंग को दरकिनार करें। किसी कैफ़े में बैठें, दो कॉफ़ी ऑर्डर करें और एक साथ ढलते सूरज को निहारें।

    3. अध्यात्म और सुकून चाहने वालों के लिए: बेंगलुरु से तिरुपति या भोपाल से उज्जैन

    हर ट्रिप के लिए कॉकटेल मेन्यू की ज़रूरत नहीं होती। अगर एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का आपका विचार शोर-शराबे से ज़्यादा चिंतन और सुकून से जुड़ा है, तो एक धार्मिक शहर वो अनुभव दे सकता है जो कोई बीच कभी नहीं दे सकता, एक ऐसा वीकेंड जो भक्ति, परंपरा और उस शांति से भरा हो जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नहीं मिलती।

    दक्षिण भारत में यह जगह तिरुपति है। तिरुमला मंदिर परिसर के दर्शन इस ट्रिप का मुख्य केंद्र हैं, लेकिन सही मायने में रास्ते का सफ़र एक-दूसरे से जुड़ने में अहम भूमिका निभाता है। यहाँ न्यूगो का बेंगलुरु-तिरुपति रूट आपके काम आता है, जो आपको बिना किसी जल्दबाज़ी के पहुँचाता है और उन सभी बातों पर खुलकर चर्चा करने का समय देता है जिनके लिए आमतौर पर वक्त नहीं मिलता।

    मध्य भारत में ऐसी ही एक ट्रिप है भोपाल से उज्जैन, देश के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में से एक, जहाँ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। यहाँ जीवन की रफ़्तार मोबाइल नोटिफ़िकेशन से नहीं, बल्कि मंदिर की घंटियों से तय होती है। यह ट्रिप घूमने-फिरने से ज़्यादा, कुछ समय के लिए सांसारिक उलझनों व मानसिक तनाव से विमुख होने का माध्यम है। न्यूगो का भोपाल-उज्जैन रूट इस वीकेंड ट्रिप को और भी आसान बना देता है, जिससे सफ़र खुद आपकी मानसिक थकावट को मिटाने का हिस्सा बन जाता है।

    यादगार पल बनाने के लिए: सफ़र के दौरान बचपन के रक्षा बंधन की पुरानी यादों को ताज़ा करें, और हमेशा के लिए यह तय करें कि किसकी याददाश्त और घटना का सच सही है!

    4. जिन्हें बस एक ब्रेक की ज़रूरत है: दिल्ली से देहरादून

    हर भाई-बहन की जोड़ी को लिस्ट बनाकर घूमना पसंद नहीं होता। कुछ को बस शहर की भागदौड़, शोर-शराबे और हफ्ते भर से रेस्टोरेंट बुकिंग को लेकर चल रही चैट ग्रुप्स में जारी चर्चाओं से मुक्ति चाहते हैं, देहरादून बिना किसी दिखावे के यही सुकून देता है। यह कोई बहुत ज़्यादा व्यस्त टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की कोशिश नहीं करता, और यही इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है।

    गुच्चूपानी (रॉबर्स केव) के ठंडे पानी में पैर डालकर अपनी सुबह बिताएँ, दोपहर में मालसी डियर पार्क या फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) के भव्य परिसर में टहलते हुए वक्त को धीरे-धीरे गुज़रने दें, और दिन का अंत पहाड़ों की ताज़ा हवा में बिना किसी नोटिफ़िकेशन के करें। यह कोई थका देने वाला शेड्यूल नहीं, बल्कि एक रिसेट बटन जैसा है।

    यहाँ रास्ते का सफ़र भी मायने रखता है। न्यूगो का दिल्ली-देहरादून रूट पहाड़ों की शुरुआत से पहले आपको शांति का एहसास कराता है, यह एक ऐसा सफ़र है जहाँ रास्ते के आधे तक पहुँचते-पहुँचते आप बिना सोचे-समझे ही अपना फ़ोन चेक करना बंद कर देते हैं।

    यादगार पल बनाने के लिए: आप जहाँ भी हों, पूरे एक घंटे के लिए अपने फ़ोन बैग में रख दें। जो सबसे पहले फ़ोन चेक करेगा, वह दूसरे को कॉफ़ी पिलाएगा।

    5. कल्चर एक्सप्लोरर्स के लिए: हैदराबाद से विजयवाड़ा

    उन भाई-बहनों के लिए जो पूल किनारे लेटने की बजाय किसी नए शहर को घूमना पसंद करते हैं, विजयवाड़ा एक कम-चर्चित लेकिन बेहतरीन विकल्प है, इतिहास, खाना और धार्मिक स्थलों का ऐसा मिश्रण जो एक वीकेंड में आराम से समा जाता है, और यहाँ ज़्यादा भीड़-भाड़ वाली मशहूर जगहों जैसी भीड़ भी नहीं मिलती।

    वहाँ पहुँचना भी इस सफ़र की खोज का हिस्सा है। न्यूगो हैदराबाद-विजयवाड़ा रूट पर भी चलता है, तो यह सफ़र खुद ही इस इलाके की पहली झलक बन जाता है, जिसे ज़्यादातर लोग सिर्फ हवाई जहाज़ से ऊपर-ऊपर देखकर निकल जाते हैं।

    यादगार पल बनाने के लिए: एक-दूसरे को एक घंटे का समय दें, बिना किसी दखल के, ताकि हर कोई ऐसी एक जगह चुन सके जो दूसरे को पता ही नहीं थी कि वह देखना चाहता था।

    6. जिन्हें मंज़िल से ज़्यादा सफ़र पसंद है: बेंगलुरु से पॉन्डिचेरी

    कुछ भाई-बहनों का रिश्ता घूमने-फिरने से ज़्यादा उनके अपने व्यक्तिगत हँसी-मज़ाक और शेयर की गई म्यूज़िक प्लेलिस्ट पर चलता है, ऐसी जोड़ी के लिए सड़क ही पूरी ट्रिप का असली मज़ा है। पॉन्डिचेरी की शांत और धीमी तटीय ज़िंदगी इस सफ़र का एक बेहतरीन अंत है, लेकिन असली छुट्टियाँ तो शहर छोड़ते ही शुरू हो जाती हैं।

    न्यूगो का बेंगलुरु-पांडिचेरी इलेक्ट्रिक कोच रूट इसी अहसास को ख़ास बनाता है, घंटों तक बिना किसी रुकावट के बातें, बैकग्राउंड में वर्क-स्लैक की कोई टेंशन नहीं, और सिर्फ़ आप दोनों के बीच तटीय किनारे तक फैला हुआ लंबा रास्ता।

    यादगार पल बनाने के लिए: निकलने से पहले एक जॉइंट प्लेलिस्ट बनाएँ, दोनों के पाँच-पाँच गाने। फिर चाहे आपको अपने भाई या बहन की पसंद कितनी भी बुरी क्यों न लगे, गीत बदलने की अनुमति कदापि नहीं है!

    उपहार से परे

    रक्षाबंधन हमेशा से प्यार और सुरक्षा के अटूट बंधन का त्योहार रहा है, लेकिन जैसे-जैसे ज़िंदगी बदल रही है, इसे मनाने का तरीक़ा भी बदल रहा है। जब आप अलग-अलग शहरों में रहने लगते हैं, तो जल्दबाज़ी में किया गया डिनर और वीडियो कॉल पर बांधी गई राखी सिर्फ़ एक रस्म लगने लगती है, कोई जश्न नहीं।

    एक छोटी सी ट्रिप इस पूरे माहौल को बदल देती है। चाहे जयपुर में स्ट्रीट फ़ूड का मज़ा लेना हो, पॉन्डिचेरी में बिना किसी काम के सुकून से बैठना हो, तिरुपति में आस्था का अहसास करना हो या फिर बेंगलुरु से पॉन्डिचेरी के रास्ते में दिल खोलकर बातें करना हो, मंज़िल से ज़्यादा अहमियत उस एक साथ बिताए समय की हो जाती है।

    शायद इस साल का सबसे बेहतरीन तोहफ़ा यही है: कोई रैप किया हुआ सामान नहीं, बल्कि बिना किसी जल्दबाज़ी के साथ बिताए कुछ दिन और एक सच्ची, सुकून भरी बातचीत।

    नोट: रूट्स की उपलब्धता और समय सारिणी तारीख़ों के अनुसार बदल सकती है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे बुकिंग करने से पहले न्यूगो का वर्तमान शेड्यूल ज़रूर चेक कर लें।

     

     

    अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – विकास कुमार- 8057409636

  • उच्च शिक्षा को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने को विश्वविद्यालय बनायेगे रोड़मैप

    उच्च शिक्षा को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने को विश्वविद्यालय बनायेगे रोड़मैप

     

    रूड़की/देहरादून,
    सूबे में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयान को सभी विश्वविद्यालय ठोस व समयबद्ध रोड़मैप तैयार करेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा को रोजगारपरक, नवाचार आधारित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिये विश्वविद्यालयों को परंपरागत शिक्षण पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीक एवं उद्योग जगत की आवश्यकताओं के साथ ही भारतीय ज्ञान परम्परा को भी पाठ्यक्रमों में शामिल करना होगा। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली व छात्रों के डेटा को सुरक्षित रखने के लिये भी ठोस कदम उठाने होंगे।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज आईआईटी रूड़की में आयोजित ‘उत्तराखंड एनईपी काॅन्क्लेव-2026’ में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार रखे। ‘एनईपी एक्शन प्वाइंट टू इंस्टीट्यूशनल एक्शनः उत्तराखंड हायर एजुकेशन रोड़मैप’ थीम पर आयोजित राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये डाॅ. रावत ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के शत-प्रतिशत प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिये सभी विश्वविद्यालयों को स्पष्ट व समयबद्ध रोडमैप तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ कौशल, नवाचार और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिये विश्वविद्यालयों को परंपरागत शिक्षण पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीक एवं उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित करने होंगे। साथ ही विश्वविद्यालयों में आधुनिक लैब, इनोवेशन सेंटर, स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने होंगे ताकि छात्र-छात्राएं इसका अधिक से अधिक लाभ उठा सके। डाॅ. रावत ने विश्वविद्यालयों को स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के उद्योगों के साथ एमओयू कर विद्यार्थियों के लिये इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट, प्रोजेक्ट वर्क, प्रशिक्षण तथा रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को कहा। उन्होंने उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों को अपडेट करने के साथ ही विद्यार्थियों में उद्यमिता की भावना विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया।

    डाॅ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रम और शोध कार्यों को बढ़ावा दें, जिनका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय युवाओं को मिले। पर्यटन, कृषि, बागवानी, आयुष, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, हिमालयन इकोलाॅजी सहित स्थानीय उत्पादों से जुड़े शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी विश्वविद्यालयों को ठोस पहल करनी होगी।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य स्तर पर विश्वविद्यलयों एवं महाविद्यालयों की रैंकिंग शुरू करने, विश्वविद्यालयों में शैक्षिणक एवं शिक्षणेत्तर के शतप्रतिशत रिक्त पदों को भरने, पुरातन छात्रों का डाटा तैयार करने, छात्रावासों का सुरक्षा आॅडिट करने, पेपर लीक एवं छात्रों के डाटा को सुरक्षित रखने के साथ ही छात्रों से निरंतर संवाद करने को भी कहा।

    कार्यशाला में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.एस. रावत ने एनईपी-2020 के क्रियान्वयन, चुनौतियों एवं गुणवत्ता विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। वहीं आईआईटी रूड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने ज्ञान में मेंटरिंग एवं क्षमता निर्माण, संस्थागत सहयोग तथा हब एंड स्पोक मॉडल की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। सचिव उच्च शिक्षा बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने वर्ष 2028 तक एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग का रोडमैप एवं एजेंडा प्रस्तुत किया। इसके अलावा दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय तथा ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. अमित आर. भट्ट ने इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, रिसर्च एवं इनोवेशन तथा पाठ्यक्रम में आवश्यक अपडेट को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया।

    इसी क्रम में एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. एस.एस. बिष्ट तथा एसजीआरआर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. प्राथापन ने नए इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, इनक्यूबेशन सेंटर एवं मेगा एजुकेशन हब की संभावनाओं पर प्रस्तुतिकरण दिया।

    उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी तथा श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश महाजन ने यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं विदेशी संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग विषय पर अपने विचार रखे। वहीं तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, एच.एन.बी. चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. भानु दुग्गल तथा जी.बी. पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कश्यप ने कौशल आधारित शिक्षा, इंटर्नशिप योजना, टेक-रेडी वर्कफोर्स तथा कृषि क्षेत्र की फ्यूचर रेडीनेस पर प्रस्तुतिकरण दिया। इस अवसर पर आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर के एचओडी बिजनेस डेवलपमेंट आदित्य प्रसाद ने उत्तराखंड में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने एवं नए स्टार्टअप की स्थापना को लेकर अपना प्रस्तुतिकरण दिया। उनकी टीम में प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य प्रधान, सुधांशु एवं दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।

    कार्यशाला का संचालन आईआईटी रूड़की के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एन.के. नवानी ने किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. वी.एन. खाली, संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा प्रदीप कुमार नौटियाल, संयुक्त निदेशक प्रो. संगीता गुप्ता, प्रो. ए.एस. उनियाल, दीपक पाण्डे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • देवभूमि की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता

    देवभूमि की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता

    देहरादून।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को श्री ब्रह्म निवास आश्रम, सप्तसरोवर रोड,भूपतवाला में पूज्य सतगुरु लाल दास महाराज के 51वाँ निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य सतगुरू लाल दास महाराज ने अपने जीवन में आध्यात्मिकता को प्राथमिकता देते हुए समाज को सेवा, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने भक्ति को जन जन तक पहुँचाया है। उनकी वाणी में अद्भुत शक्ति थी और दृष्टि में भगवान बुद्ध के समान असीम करुणा थी। पूज्य सतगुरु ने समाज को जोड़ने का काम किया। उन्होंने जीवन भर यही सिखाया कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संतों का सानिध्य और सतगुरु की कृपा मिलना सौभाग्य की बात है। हमारे संत समाज ने हमेशा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए बढ़-चढ़कर योगदान दिया है। उनके मार्गदर्शन से समाज को धर्म और संस्कृति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। भारत की महान संस्कृति हमें सिखाती है कि कितनी भी कठिनाइयां आएं, हमें अच्छे समाज के निर्माण और विकास को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सनातन धार्मिक संस्कृति के पुनर्जागरण का स्वर्णिम काल चल रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर, काशी कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर जैसे कार्यों के साथ उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और प्रेरणा से किया गया है। मंदिर माला मिशन के तहत प्रदेश के विभिन्न मंदिरों का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। रोपवे बनने से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दुर्गम तीर्थ स्थलों तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा अधिक सुगम होगी। हरिद्वार में गंगा कॉरिडोर, ऋषिकेश कॉरिडोर, आस्था पथ तथा शारदा और यमुना तटों के विकास जैसे कार्य भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि का मूल स्वरूप, पवित्रता और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहना जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण मिले। अवैध निर्माण तथा देवभूमि की संस्कृति और सामाजिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में हिंदू अध्ययन केन्द्र बनाया गया है जिसमें धर्म और संस्कृति के साथ ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से कहा कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा,  इस दिशा में धर्म, विकास, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर एवं देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। संतों और आचार्यों के सानिध्य तथा देश-दुनिया के लोगों की आस्था के साथ देवभूमि के विकास और संरक्षण का यह अभियान निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस अवसर पर श्री सतगुरु चेतनानंद जी भूरी वाले ने कहा की संस्था द्वारा 57 वर्ष से निरंतर अखंड भोजन करवा रहा है,संस्था गरीबों की सेवा में निरंतर कार्य कर रही है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में ऐसे नियम एवं कानून लागू किए है,जिसका पूरा देश अनुसरण कर रहे है,उनके कुशल नेतृत्व में प्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर हो रहा है।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं उपाध्यक्ष आपदा प्रबंधन विनय रोहिल्ला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

    इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल,जिलाध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा,राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति,ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, आशु चौधरी,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र डोभाल,एसपी ट्रैफिक निशा यादव,अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार,सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी,उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा,सचिव एचआरडीए प्रत्यूष सिंह,साधु संत सहित विभिन्न प्रदेशों से आए भक्तगण मौजूद रहे।

  • यमुनोत्री धाम की यात्रा में बना नया रिकॉर्ड पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 6.68 लाख

    यमुनोत्री धाम की यात्रा में बना नया रिकॉर्ड पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 6.68 लाख

    देहरादून

    उत्तराखण्ड में मानसून की कठिन चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा निर्बाध जारी है। इस यात्राकाल के 125 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 48 लाख के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 05 लाख 22 हजार अधिक है। यमुनोत्री धाम की यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यहां पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 06 लाख 68 हजार से अधिक पहुंच गई है। इससे पूर्व वर्ष 2025 में 06 लाख 44 हजार 637 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन को पहुंचे थे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रा हर वर्ष नए रिकॉर्ड कायम कर रही है। मानसून सीजन को देखते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। यात्रा से जुड़े रुद्रप्रयाग, चमोली, और उत्तरकाशी जनपद में आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रखा गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। मौसम के मिजाज को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की  है, लेकिन आस्था मौसम पर भी भारी पड़ रही है।

    इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। शुक्रवार 21 अगस्त तक इस यात्राकाल के 125 दिनों में कुल 48 लाख 04 हजार 897 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इसी अवधि में 42 लाख 82 हजार 263 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 05 लाख 22 हजार 634 यात्री अधिक पहुंचे हैं।

    चारों धामों में अब तक की कुल संख्या पर नजर दौड़ाएं तो बद्रीनाथ में 16 लाख 54 हजार 263, केदारनाथ में 14 लाख 65 हजार 370, गंगोत्री में 07 लाख 47 हजार 671 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 68 हजार 163 यात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 69 हजार 430 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं। भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। बद्रीनाथ में पिछले वर्ष के मुकाबले 03 लाख 62 हजार 304 यात्री अधिक पहुंचे हैं।

    यमुनोत्री धाम में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या
    2025——6,44,637
    2024——5,15,067
    2023——5,60,918
    2022——6,21,538
    2021——–33,311
    2020———7728
    2019———4,65,534
    2018———3,94,445
    2017———3,92,208
    2016———1,55,129
    2015———1,22,926
    2014———038,294
    2013———253110
    2012———413615
    2011———448945
    2010———309634
    2009——–322242
    2008——–327611
    2007——–287870
    2006——–216883
    2005——–169046
    2004——–102331
    2003——–78,050
    2002——–54023
    2001——–54074
    2000——-88672

    चारधाम यात्रियों की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए चारों धामों और यात्रा पड़ावों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। यात्रा बिना किसी बाधा के संचालित हो रही है, लेकिन मौसम खराब होने पर यात्रा को नियंत्रित भी किया जा रहा है। यात्रा से जुड़े सभी जनपदों के डीएम भी व्यवस्थाओं पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।

  • द पेसल वीड स्कूल की बास्केटबॉल विजय का सिलसिला जारी: वर्षों की दृढ़ता लाई सफलता का फल

    द पेसल वीड स्कूल की बास्केटबॉल विजय का सिलसिला जारी: वर्षों की दृढ़ता लाई सफलता का फल

     

    देहरादून,: द पेसल वीड स्कूल ने एक बार फिर स्कूली बास्केटबॉल में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है। सीबीएसई क्लस्टर अंडर-17 बास्केटबॉल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय की टीम ने सभी पाँच मुकाबले जीतकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि कौशल, अनुशासन और टीम भावना के उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है।

    यह विजय कोई एकाकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि वर्षों की निरंतर मेहनत, प्रतिबद्धता और समर्पित प्रशिक्षण की परिणति है, जो कोच श्री शिवम पंवार के मार्गदर्शन में किया गया। ट्रॉफियों और पदकों की चमक आने से बहुत पहले ही इन युवा खिलाड़ियों ने सुबह जल्दी उठकर बास्केटबॉल कोर्ट पर कदम रखा और घंटों अनुशासित अभ्यास किया। अनगिनत सुबहों में किए गए ड्रिल्स, फिटनेस सत्र, बार-बार शॉट्स का अभ्यास, रणनीतिक प्रशिक्षण और अथक परिश्रम अब एक विजयी विरासत में परिवर्तित हो चुके हैं।

    टीम की हालिया उपलब्धियाँ दर्शाती हैं कि यह सफलता एक मजबूत और निरंतर विकसित होती नींव पर निर्मित हुई है। विद्यालय ने डीपीएसजी बास्केटबॉल टूर्नामेंट में प्रथम स्थान प्राप्त किया, आईपीएससी 2026 बास्केटबॉल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया और जिला स्तरीय अंडर-19 प्रतियोगिता में विजेता बनने का गौरव हासिल किया। विभिन्न स्तरों की इन प्रतियोगिताओं में मिली सफलताएँ द पेसल वीड स्कूल में बास्केटबॉल की बढ़ती शक्ति और निरंतरता को दर्शाती हैं।

    सीबीएसई क्लस्टर अंडर-17 टूर्नामेंट में टीम ने पूरे प्रतियोगिता के दौरान अपनी विजयी लय बनाए रखी: प्रथम चरण: मेयूर स्कूल, नोएडा को 38–17 से हराया
    क्वार्टर फाइनल: सेंट एंड्रयू स्कूल, आगरा को 32–26 से हराया, नॉकआउट मुकाबला: डीपीएस नोएडा को 42–32 से हराया , सेमीफाइनल: मेरठ पब्लिक स्कूल को 38–35 से हराया, फाइनल: नेहरू वर्ल्ड स्कूल, गाजियाबाद को 33–28 से हराया पाँच मुकाबले। पाँच जीत। एक शानदार चैंपियनशिप।

    यह उपलब्धि खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प और उनके प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का गौरवपूर्ण प्रतिबिंब है। प्रशिक्षकों के निरंतर प्रयासों ने प्रतिभा को प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। द पेसल वीड स्कूल के चेयरमैन डॉ. प्रेम कश्यप ने कहा कि टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चे चैंपियन फाइनल के दिन नहीं बनते; वे सुबह की शुरुआत, खाली कोर्ट, निरंतर अभ्यास, असफलताओं, अनुशासन और हर दिन पहले से अधिक मजबूत होकर लौटने के संकल्प से तैयार होते हैं।

    द पेसल वीड स्कूल के प्रधानाचार्य ने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को उनकी शानदार उपलब्धि पर बधाई दी और टीम की सफलता पर अत्यंत गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इन विजयों के पीछे वर्षों से किए जा रहे कठिन परिश्रम को भी सराहा। विद्यालय ने खिलाड़ियों के माता-पिता और संपूर्ण स्कूल समुदाय के निरंतर प्रोत्साहन एवं सहयोग की भी प्रशंसा की।

    द पेसल वीड स्कूल शैक्षणिक विकास के साथ-साथ खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालय विद्यार्थियों को अनुशासन, दृढ़ता, नेतृत्व, टीम भावना और उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रयास करने का साहस विकसित करने के अवसर प्रदान करता है।

    बास्केटबॉल टीम की यह यात्रा एक सशक्त संदेश देती है कि दृढ़ता का फल अवश्य मिलता है—और चैंपियन एक-एक अभ्यास, एक-एक चुनौती और एक-एक जीत के साथ तैयार होते हैं।

    द पेसल वीड स्कूल बास्केटबॉल टीम सीबीएसई क्लस्टर अंडर-17 चैंपियन | डीपीएसजी टूर्नामेंट – प्रथम स्थान | आईपीएससी 2026 | जिला स्तरीय अंडर-19 विजेता

    विजयी सिलसिला जारी है

  • आयुक्त गढ़वाल ने सहसपुर में विशेष शिविरों का निरीक्षण कर एसआईआर कार्य की जानी प्रगति

    आयुक्त गढ़वाल ने सहसपुर में विशेष शिविरों का निरीक्षण कर एसआईआर कार्य की जानी प्रगति

     

    *देहरादून,
    आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप ने आज विधानसभा सहसपुर क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत आयोजित सघन शिविरों एवं चयनित मतदेय स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण एवं मैपिंग कार्य की प्रगति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों एवं बीएलओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
    उन्होंने निर्देशित किया कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मतदाता सूची में मैपिंग से छूटे मतदाताओं के प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण किया जाए। बीएलओ द्वारा मतदाताओं से आवश्यक अभिलेख एवं निर्धारित प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हुए उनका नियमानुसार सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं निर्धारित समयसीमा के भीतर संपादित की जाए।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिविरों में पहुंचे नागरिकों से भी संवाद किया तथा एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में उनकी शंकाओं एवं समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों को मैपिंग एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में स्पष्ट एवं सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो। गढ़वाल आयुक्त ने नागरिकों से अपील की कि जिन मतदाताओं की अभी तक मतदाता सूची में मैपिंग नहीं हो पाई है, वे घबराएं नहीं तथा निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रमाण-पत्र/अभिलेख जल्द से जल्द संबंधित बीएलओ अथवा निर्धारित शिविर में उपलब्ध कराएं। आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत नियमानुसार उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करने की कार्रवाई की जाएगी।
    निरीक्षण के लिए चयनित मतदेय स्थलों में राजकीय प्राथमिक विद्यालय झाझरा, जूनियर हाईस्कूल सेलाकुई, राजकीय इंटर कॉलेज सेलाकुई तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीपुर सहित क्षेत्र के अन्य संबंधित स्थल शामिल रहे। इन मतदेय स्थलों पर मतदाताओं की मैपिंग एवं पुनरीक्षण संबंधी कार्यवाही का जायजा लिया गया। आयुक्त ने बीएलओ एवं संबंधित निर्वाचन कार्मिकों को निर्देशित किया कि वे घर-घर संपर्क एवं शिविरों के माध्यम से ऐसे मतदाताओं तक पहुंच सुनिश्चित करें, जिनकी मैपिंग किसी कारणवश लंबित है। साथ ही, प्राप्त दस्तावेजों का नियमानुसार परीक्षण करते हुए प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
    उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्ध, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ एसआईआर कार्य को संपादित करें। इस अवसर पर नगर मजिस्टेªट/ईआरओ सहसपुर राकेश तिवारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली सहित सम्बन्धित अधिकारी कार्मिक उपस्थित रहे।

  • पोवा 8 प्रो 5जी भारत के पहले एआई असिस्टेंट के साथ स्टोर्स में उपलब्ध

    पोवा 8 प्रो 5जी भारत के पहले एआई असिस्टेंट के साथ स्टोर्स में उपलब्ध

     

    देहरादून | : पोवा 8 प्रो 5जी की बिक्री 21 अगस्त से पूरे भारत में शुरू हो रही है। यह स्मार्टफोन उन यूज़र्स के लिए एक ऐसा अनुभव लेकर आया है, जो चाहते हैं कि उनका फोन थोड़ा कम… साधारण और कुछ ज्यादा खास महसूस हो।

    पीछे की तरफ दिया गया अलाइव मैट्रिक्स डिस्प्ले इसका सबसे बड़ा आकर्षण है। यह डॉट-मैट्रिक्स पैनल फोन के पिछले हिस्से को एक उपयोगी स्क्रीन में बदल देता है, जहां बैटरी स्टेटस, टाइमर और नोटिफिकेशन दिखाई देते हैं। वहीं, स्मार्ट कॉलर आईडी कॉल रिसीव करने से पहले संभावित स्पैम कॉल की पहचान करने में मदद करती है।
    फोन को स्क्रीन की तरफ से नीचे रख दें, तो यह एक डेस्क क्लॉक में बदल जाता है। अलग दिखना आसान है, लेकिन अलग दिखने के साथ वास्तव में उपयोगी होना मुश्किल—और पोवा इसी खासियत पर दांव लगा रहा है।

    कीमत, उपलब्धता और लॉन्च ऑफर्स
    पोवा 8 प्रो 5जी 21 अगस्त से Flipkart और देशभर के रिटेल आउटलेट्स पर ₹49,999 की कीमत में उपलब्ध होगा। खरीदारों को 18 महीने तक नो-कॉस्ट EMI की सुविधा मिलेगी, जिसकी शुरुआत ₹2,777 प्रति माह से होती है। इसके अलावा, कार्ड और UPI ट्रांज़ैक्शन पर ₹3,000 का इंस्टेंट कैशबैक भी मिलेगा, जिससे फोन की प्रभावी कीमत ₹46,999 हो जाएगी।

    यह फ़ोन अपने शानदार डिज़ाइन के साथ-साथ रोज़ाना इस्तेमाल के लिए बेहतरीन अनुभव भी देता है। इसका 144Hz AMOLED डिस्प्ले तेज धूप में भी बेहतर विजिबिलिटी देता है और अंधेरा होने पर आँखों को आराम देता है । इससे स्ट्रीमिंग और रोजमर्रा की स्क्रॉलिंग का अनुभव बिना किसी रुकावट के स्मूथ बना रहता है।

    कैमरा सिस्टम इस तरह तैयार किया गया है कि मुश्किल काम यह खुद आपके लिए कर सके। 50MP Sony LYTIA 700C OIS सेंसर हाई-कॉन्ट्रास्ट वाले सीन और कम रोशनी में भी स्थिर और स्पष्ट तस्वीरें लेने में मदद करता है। वहीं, 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा फ्रेम में ज्यादा दृश्य को शामिल करने की सुविधा देता है। इसके अलावा, AI ऑटो ज़ूम, 3D फ़ोटो और मोशन ट्रेल जैसे फीचर्स आपको अलग-अलग तरह से फोटोग्राफी के साथ प्रयोग करने का मौका देते हैं, बिना हर तस्वीर को एक जटिल प्रक्रिया बनाए।

  • भारत में लॉन्च हुई नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस

    भारत में लॉन्च हुई नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस

     

    देहरादून। नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस को आज भारत में लॉन्च किया गया। BMW X1 देश की सबसे सफल लग्जरी स्पोर्ट्स एक्टिविटी व्हीकल है और अब इसका नया अवतार लॉन्ग व्हीलबेस पेश किया गया है, जिसमें मिलती है बेहतर प्रदर्शन के साथ कई डिजिटल अपग्रेड्स।

    नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस का पेट्रोल वेरिएंट BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई में स्थानीय रूप से उत्पादित किया जाता है और आज से BMW डीलरशिप पर इसकी बुकिंग की जा सकती है।

    श्री हरदीप सिंह बरार, प्रेसिडेंट और CEO, BMW ग्रुप इंडिया ने कहा, “BMW X1 भारत में एक शानदार सफलता की कहानी रही है और लग्जरी SUV सेगमेंट में अपनी बढ़त बनाए हुए है। नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस एक दमदार नई पेशकश के साथ इस बढ़त को और आगे बढ़ाती है। ज्यादा जगह, ज्यादा आराम, ज्यादा टेक्नोलॉजी और ज्यादा शानदार मौजूदगी। अपने सेगमेंट की सबसे लंबी, सबसे ऊंची और सबसे चैड़ी कार होने के नाते, यह ऐसी जगह और पिछली सीट पर ऐसा आराम देती है जो वाकई बेमिसाल है, साथ ही यह BMW की पहचान बनी फुर्ती, परफॉर्मेंस और ड्राइविंग के मजे को भी बरकरार रखती है। इस लॉन्च के साथ, हम न केवल इस मॉडल की आकर्षक पहचान को बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम उस उम्मीद को भी एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं जो ग्राहक इस क्लास की लग्जरी SUV से करते हैं।”

    नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस।
    अपने आकर्षक डिजाइन और बेहद विशाल इंटीरियर के साथ, नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस अपनी एक तगड़ी पहचान बनाती है। क्लास के बेहतरीन डायमेंशंस – लंबाई (4,616 mm), चैड़ाई (2,104 mm), ऊंचाई (1,641 mm) और व्हीलबेस (2,800 mm) – के कारण यह अपने सेगमेंट की सबसे लंबी कार होने के साथ-साथ इंडिया में उपलब्ध सबसे अधिक आलिशान 5-सीटर SUVs विकल्प बनती है।

    इसका अगला हिस्सा BMW की सिग्नेचर किडनी ग्रिल और सेगमेंट यूनिक अडाप्टिव LED हेडलाइट्स, की बदौलत बेहद आकर्षक नजर आता है। इसका इंटेलीजेंट BMW हाई बीम असिस्टेंट रात के समय सामने से आने वाली गाड़ियों पर तेज रोशनी पड़ने से बचाता है। एल्युमीनियम सैटिनेटेड रूफ रेल्स वाली लंबी रूफ लाइन, चौकोर व्हील आर्च कंटूर और ट्यूबलेस टायरों वाली 18-इंच M लाइट अलॉय व्हील्स इसके समग्र सुन्दरता को और भी निखारते हैं।

    इंटीरियर बड़ी और खुली होने के साथ ही आधुनिक डिजाइन, बेहतरीन कारीगरी और नवीन कार्यशीलता के वजह से अलग ही कम्फर्ट महसूस होता है। ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर, दोनों के लिए मल्टी-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल स्पोर्ट सीटें दी गई हैं। लंबी व्हीलबेस (+108 mm) की बदौलत पीछे बैठने वाले यात्रियों को एक बेहतरीन अनुभव मिलता है। सेगमेंट का सबसे स्पेसियस रियर केबिन, जिसमें भरपूर लेगरूम (+150 mm) और असाधारण नी-रूम (+109 mm) मिलता है। बखूबी कंटूर्ड सीट्स, लंबी कुशनिंग (+15 mm) और बेहतर बोल्स्टरिंग से बेजोड़ लक्जरी और कम्फर्ट सुनिश्चित होता है, फिर चाहे सफर कितना भी लंबा क्यों न हो।

    वाइडस्क्रीन कर्व्ड डिस्प्ले – जिसकी सीमलेस ग्लास सर्फेस ड्राइवर की ओर झुकी है – केबिन का डिजिटल, हाई-क्लास आकर्षण बढ़ाती है। ‘एल्युमीनियम मेशइफेक्ट’ ट्रिम वाले सुडौल और सुव्यवस्थित डैशबोर्ड के साथ लक्जरी इंस्ट्रूमेंट पैनल की खूबसूरती देखते ही बनती है। स्टोरेज वाला फ्लोटिंग आर्मरेस्ट एर्गोनोमिकली कंट्रोल क्लस्टर के साथ सुमेलित है। एक और प्रीमियम फीचर – 12 लाउडस्पीकरों और 205W आउटपुट वाला हर्मन कार्डों साउंड सिस्टम कॉन्सर्ट जैसा अनुभव प्रदान करता है। इसका पैनोरमा सनरूफ एक शानदार आकर्षण है। 9 स्क्वायर फीट की एरिया वाला यह सनरूफ इस सेगमेंट का सबसे बड़ा सनरूफ है और केबिन में अधिक जगह और प्राकृतिक रोशनी का एहसास कराता है।