Category: शिक्षा

  • शिक्षकों के स्थानांतरण को मिलेगा अतिरिक्त समयः डाॅ. धन सिंह रावत

    शिक्षकों के स्थानांतरण को मिलेगा अतिरिक्त समयः डाॅ. धन सिंह रावत

     

    देहरादून,
    विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिये अतिरिक्त समय मांगने के साथ ही स्थानांतरण एक्ट से छूट देने का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा जायेगा, ताकि प्रदेश के जिन विद्यालयों में पर्याप्त छात्र संख्या के बावजूद शिक्षकों के पद रिक्त हैं उनको भरा जा सके। इसके अलावा शिक्षकों के पदोन्नति प्रकरण के स्थाई समाधान को अंतिम विकल्प के रूप में अध्यादेश लाने पर भी विचार गया जा सकता है। इस संबंध में शासन स्तर पर न्याय, कार्मिक एवं वित्त विभाग के साथ सहमति बना ली गई है।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक ली, जिसमें मुख्य सचिव सहित, न्याय, कार्मिक व वित्त विभाग के उच्चाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण एवं पदोन्नति के लम्बित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण को विचार-विमर्श किया गया। डा. रावत ने बताया कि शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण एवं वरिष्ठता का प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं लिया जा सका है। उक्त के दृष्टिगत उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण को लेकर स्थानांतरण एक्ट में छूट के साथ ही समयवृद्धि की मांग का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजे जाने का निर्णय लिया गया है, ताकि विद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त शिक्षकों के पदों को धारा-27 एवं अनुरोध श्रेणियों के आधार पर भरा जा सके। इसके लिये महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को शीघ्र दोनों प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है। डाॅ. रावत ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षकों के वरिष्ठता प्रकरण भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके चलते विभाग पदोन्नति देने में असमर्थ है, जबकि शिक्षक संगठन लगातार पदोन्नति की मांग को लेकर मुखर है। जिसको देखते हुये शासन ने कोर्ट के निर्णय में समय लगने की सम्भावना के मध्यनजर अंतिम विकल्प के रूप में पदोन्नति हेतु अध्यादेश लाने का विकल्प खुला रखा है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अध्यादेश का प्रस्ताव भी तैयार रखने को कहा गया है, ताकि उच्च न्यायालय में दायर वादों का समय पर निराकरण न होने के दृष्टिगत अध्यादेश लाकर वरष्ठिता का निर्धारण करते हुये शिक्षकों पदोन्नति दी जा सके।

    बैठक में शिक्षकों के त्रिस्तरीय ढांचे सहित एससीईआरटी व डायट के नये ढांचे के गठन एवं नियमावली बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये। इसके अतिरिक्त विभागीय मंत्री ने कहा कि सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों के शत-प्रतिशत प्रस्ताव तीन दिन के भीतर मंगा लिये जाय, ताकि धनराशि आवंटित की जा सके। उन्होंने प्रदेशभर के सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत शौचालय निर्माण सुनिश्चित करने के साथ-साथ पेयजल, विद्युत आपूर्ति एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये। इसके अतिरिक्त अशासकीय विद्यालयों के प्रांतीयकरण तथा शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को नियमानुसार जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।

    बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन, प्रमुख सचिव न्याय अमित कुमार, सचिव कार्मिक शैलेष बगोली, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा नमामि बंसल, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, संयुक्त निदेशक संस्कृत शिक्षा मंजू भारती सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में और सुदृढ़ होगा सड़क नेटवर्क: डॉ धन सिंह रावत

    श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में और सुदृढ़ होगा सड़क नेटवर्क: डॉ धन सिंह रावत

     

    देहरादून,

    श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में सड़क संपर्क को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिये खिर्सू, पाबों एवं थलीसैण विकासखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत 23 नए मोटरमार्गों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के दूरस्थ गांवों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

    सूबे के कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (यूआरआरडीए) एवं पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के साथ बैठक कर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न मोटरमार्गों के निर्माण, डामरीकरण, नवीन सड़कों के सर्वेक्षण तथा आपदाग्रस्त मार्गों के पुनर्निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

    बैठक में उन्होंने थलीसैण, खिर्सू एवं पाबों विकासखंड में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत प्रस्तावित 23 महत्वपूर्ण मोटरमार्गों गवाणा-मंगलाकोटी मोटर मार्ग, बयाली-मथीगांव मोटर मार्ग,पाटोली से नौगांव-पजयाना मोटर मार्ग, चमेलियू-नैलटौक मोटर मार्ग, चमेलियू-थापला मोटर मार्ग, बगड-कण्डोला-धरखोला- भण्डई मोटर मार्ग, कर्णप्रयाग-हरिद्वार एन०एच० से चुणखेत-मेगोरी-ऐगार मोटर मार्ग, पाबौं-मासौं मोटर मार्ग से ईटूड-धरकोट तल्ला मोटर मार्ग, तलबैंड-मथीगांव मोटर मार्ग, चौरा-बंगारी मोटर मार्ग, त्रिपालीसैंण-किरसाल मोटर मार्ग, एन0एच0 121 से सुनारगांव मोटर मार्ग, चुठाणी-काण्डा गदेरा से घण्डियाली बरतोली मोटर मार्ग, एन०एच० 74 नियर त्रिपालीसैंण-कठूड मोटर मार्ग, एन०एच० 74 नियर भैरवखाल-सलौन मोटर मार्ग, त्रिपालीसैंण-गडोली कुथ मोटर मार्ग, झारपाली – हंस्यूडी – धांधणखेत एमआर (चरण – I और II), भीरा- गंगाऊ एमआर (स्टेज -I & ll), उफरैंखाल-भटभटाऊ- भगवतीतलैया मोटरमार्ग, मैखोली-सुंदर गांव से डैड दैडा मोटरमार्ग, कल्याणखल – किमोज-भैरगांव तल्ला मोटरमार्ग, SH52 से बंकुडा मोटर रोड तक तथा जगतपुर से कन्डेई मोटरमार्ग
    के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा इन सडक़ों के निर्माण से क्षेत्र में सड़कों का जाल बीछ जाएगा और गांव-गांव सड़क सुविधा उपलब्ध हो जायेगी।

    डॉ रावत ने आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर पूरा करने को भी अधिकारियों को कहा, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव को बेहतर, सुरक्षित सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। सड़क नेटवर्क के विस्तार से क्षेत्र में विकास को नई गति मिलेगी, पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    बैठक में पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पाबों, खिर्सू एवं थलीसैण विकासखंडों में 25 मोटरमार्गों को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। जिसमें श्रीनगर-1 खंड के 21 मोटरमार्ग, श्रीनगर -2 खंड की 01 तथा सिंचाई खंड बैजरो की 03 सड़कें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त शेष निर्माणाधीन मोटरमार्गों तथा नवीन सड़कों के सर्वेक्षण का कार्य भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

    बैठक में मुख्य अभियंता उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी एस. के. पाठक, मुख्य अभियंता गढ़वाल मनीष मित्तल, अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई एस. के. बसलियाल, अधिशासी अभियंता पी. आर. चमोली, पी.एस. बिष्ट तथा अधिशासी अभियंता यूआरडीडीए विजयपाल नेगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने किया सहकारिता विभाग के नये पोर्टल का शुभारंभ

    सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने किया सहकारिता विभाग के नये पोर्टल का शुभारंभ

     

    देहरादून,

    उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ सभागार, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निबंधक सहकारी समितियां कार्यालय के अत्याधुनिक ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके अलावा उन्होंने आयोग से चयनित 45 सहायक सहकारी निरीक्षकों (वर्ग-2) को नियुक्ति पत्र वितरित किये और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नव विकसित पोर्टल के माध्यम से सहकारी समितियों से जुड़ी सभी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी। जिससे आमजन को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    डॉ रावत ने कहा कि पोर्टल पर सहकारी समितियों का पंजीकरण, दस्तावेज अपलोड, शिकायत एवं सुझाव निस्तारण, नामांकन सत्यापन, वार्षिक प्रतिवेदन, ऑडिट प्रबंधन, सदस्यता संबंधी विवरण, दस्तावेज प्रबंधन तथा एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    नव नियुक्त सहायक सहकारी निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुये डॉ. रावत ने कहा कि वे विकसित भारत के युवा ब्रांड एम्बेसडर हैं और सहकारिता आंदोलन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका होगी।
    उन्होंने नव नियुक्त सहायक सहकारी निरीक्षकों को कहा कि वह प्रत्येक ब्लॉक में सहकारिता नेटवर्क को मजबूत करते हुए कम से कम एक बहुद्देशीय सहकारी समिति को आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करें। सरकार की योजना प्रत्येक ब्लॉक में एक ‘सहकारिता ग्राम’ स्थापित करने की है, जिसे आपके समर्पण और नवाचार से शीघ्र साकार किया जा सकेगा।

    डॉ. रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पहली नियुक्ति मिलना युवाओं के लिए एक अवसर है। उन्हें विश्वास जताया कि नव नियुक्त अधिकारी अपने कार्यों और नवाचारों के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति देंगे। डॉ रावत ने कहा शीघ्र ही ब्लॉक स्तर पर 100 ऋण मेले लगाये जायेंगे, जिनके माध्यम से किसानों, काश्तकारों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को ऋण वितरित किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता सचिव डॉ. इकबाल अहमद ने कहा कि सहकारिता विभाग आज जन-जन से जुड़ा विभाग बन चुका है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
    उन्होंने कहा, “सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में नव नियुक्त अधिकारियों का खासा योगदान रहेगा।

    कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निबंधक श्री मंगला प्रसाद त्रिपाठी ने नव नियुक्त सहकारी निरीक्षकों को विभागीय दायित्वों, कार्य प्रणाली एवं अपेक्षाओं से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ सहकार बंधु शप्रदीप चौधरी, सुभाष रमोला, अनु सचिव सहकारिता सुरेंद्र दत्त बेलवाल, अपर निबंधक ईरा उप्रेती, आनंद ए.डी. शुक्ल, संयुक्त निबंधक एम.पी. त्रिपाठी, रमेंद्री मंद्रवाल, उप निबंधक राजेश चौहान, मोनिका चुनेरा, सहायक निबंधक देहरादून बलवंत मनराल, उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के वरिष्ठ प्रबंधक त्रिभुवन रावत सहित विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    देहरादून,
    सूबे के कैबिनेट मंत्री डाॅ धन सिंह रावत कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। अपने भ्रमण के दौरान डाॅ. रावत अल्मोड़ा जनपद में विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। इस दौरान डाॅ. रावत राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट व स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग कर नवनिर्मित भवनों का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न शैक्षणिक व सहकारी संस्थानों का औचक निरीक्षण भी करेंगे। डाॅ. रावत अल्मोड़ा में केन्द्र सरकार के विकास, विश्वास व जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे।

    कैबिनेट मंत्री व अल्मोड़ा जनपद के प्रभारी मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि वह 11 व 12 जून को कुमाऊं मण्डल के भ्रमण पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि 12 जून शुक्रवार को वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा वह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में वाणिज्य संकाय के नव निर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। इसके उपरांत डाॅ. रावत केन्द्र सरकार द्वारा विकास के, विश्वास के, जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने पर प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने अपने 12 वर्ष पूर्ण कर लिये हैं। डाॅ. रावत अपने कुमाऊं भ्रमण के दौरान विभिन्न शैक्षिणिक कार्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों व सहकारी समितियों का भी औचक निरीक्षण करेंगे।

    इससे पहले डाॅ. रावत अपने तीन दिवसीय श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र भ्रमण के अंतिम दिन आज डुमणीकोट, पाटों में व्यापक स्तर पर जनसम्पर्क कर आम लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इसके अलावा उन्होंने 230.93 लाख की लागत से गणतखाल-कठुखाल मोटर मार्ग के डामरीकरण का लोकार्पण तथा 25 लाख की लागत से बनने वाले देवराड़ी खेल मैदान के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया, साथ ही उन्होंने बूंगीधार में प्रभागीय वनाधिकारी पौड़ी, उपजिलाधिकारी थलीसैण व दूधातोली विनसर चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विनसर महादेव मंदिर की भूमि हस्तांतरण पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये। बैठक के उपरांत डाॅ. रावत ने अल्मोड़ा जनपद के सल्ट पहुंचकर राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के नवनिर्मित अकादमिक भवन का लोकापर्ण किया।

     

  • विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा के हो पुख्ता इंतजामः डाॅ. धन सिंह रावत

    विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा के हो पुख्ता इंतजामः डाॅ. धन सिंह रावत

     

    देहरादून,
    राजकीय विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किये जायेंगे। जिससे छात्र-छात्राओं का डाटा सुरक्षित रखने के साथ ही भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में लागू डीपीडीपी एक्स का भी पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस संबंध में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

    सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर राज्य विश्वविद्यालयों की समीक्षा की। जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालयों के वेब एप्लिकेशन को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने व डाटा लीक संबंधी मामलों के लिये ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने के निर्देश कुलपतियों को दिये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डिजिटल डाटा की सुरक्षा एक चुनौती के रूप में सामने आई है, जिसके लिये सभी विश्वविद्यालयों को डिजिटल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। विभागीय मंत्री ने कहा कि देश में साइबर हमलों की सुरक्षा के लिये केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (डीपीडीपी) लागू कर दिया है, जिसके तहत साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनियता और आॅनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिये प्रभावी कदम उठाये गये हैं। राज्य विश्वविद्यालयों को भी विश्वविद्यालय एवं छात्र-छात्राओं के डाटा के सुरक्षा के लिये समुचित कदम उठाने होंगे, ताकि किसी भी प्रकार की साइबर फ्राॅड से बचा जा सके। बैठक में विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिये गये गांवों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिये गये। साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालयों से 20-20 मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये गये। जिनको राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया जायेगा। इसी प्रकार ‘एक विश्वविद्यालय एक शोध’ योजना के तहत विश्वविद्यालयों को 5-5 मिनट का प्रस्तुतिकरण तैयार करना अनिवार्य होगा, जिसका प्रस्तुतिकरण कुलाधिपति के सम्मुख किया जायेगा। इसके अतिरिक्त संस्कृत विश्वविद्यालय को हरिद्वार में देशभर के संस्कृति विश्वविद्यालयों की कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें देववाणी संस्कृत के संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया जायेगा।

    समीक्षा बैठक में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति गणों द्वारा साइबर सुरक्षा एवं परीक्षा संचालन को लेकर अपने-अपने विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रस्तुतिकरण दिया गया, तथा भविष्य की चुनौतियों को देखते हुये नई कार्ययोजना बनाने पर सहमति जताई। बैठक में आगामी छात्र संघ चुनावों में 50 फीसदी पदों छात्राओं के लिये सुरक्षित रखने पर भी सहमति जताई गई। बैठक में सचिव उच्च शिक्षा बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम, सचिव श्री राज्यपाल रविनाथ रमन, कुलपति कुमाऊं विश्विविद्यालय प्रो. डी.एस. रावत, कुलपति श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय प्रो. एन.के. जोशी, कुलपति सोबन सिंह जीन विश्वविद्यालय प्रो. एस.पी.एस बिष्ट, कुलपति संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो. रमाकांत पाण्डेय, कुलपति तकनीकी विश्वविद्यालय प्रो. तृप्ता ठाकुर, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, निदेशक उच्च शिक्षा डाॅ. वी.एन. खाली, परीक्षा नियंत्रक उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रो. आशुतोष भट्ट सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • विश्व पर्यावरण दिवस पर, डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने दिखाया कि कैसे जलवायु-अनुकूल स्कूल बच्चों को स्वस्थ रखने और बेहतर सीखने में मदद

    विश्व पर्यावरण दिवस पर, डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने दिखाया कि कैसे जलवायु-अनुकूल स्कूल बच्चों को स्वस्थ रखने और बेहतर सीखने में मदद

     

    ऋषिकेश, : जलवायु परिवर्तन अब बच्चों के रोज़मर्रा के जीवन को लगातार प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी से लेकर बाढ़ और खराब साफ-सफाई जैसी चुनौतियां बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर बुरा असर डाल रही हैं। इससे उनकी स्कूली शिक्षा में रुकावट आ रही है और उनके सीखने व आगे बढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
    वैश्विक स्तर पर, लगभग 1 बिलियन बच्चे जलवायु के बेहद गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं। अकेले भारत में, हर साल अनुमानित 24 मिलियन बच्चे जलवायु से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों से प्रभावित होते हैं। ये चुनौतियां इस बात पर ज़ोर देती हैं कि ऐसे समाधानों की तुरंत ज़रूरत है जो बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी शिक्षा दोनों की रक्षा कर सकें।
    इस बात को समझते हुए, दुनिया की बेहतरीन स्वास्थ्य और स्वच्छता कंपनी, रेकिट ने अपने प्रमुख अभियान ‘डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के तहत, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में ‘डेटॉल क्लाइमेट रेजिलीनिएंट स्कूल्स’ (डीसीआरएस) यानी जलवायु-अनुकूल स्कूल कार्यक्रम की शुरुआत की। यह पहल भारत सरकार के ‘मिशन लाइफ’ (लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट) के अनुरूप स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए रेकिट की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
    इस पहल के हिस्से के रूप में, रेकिट ने चार धाम क्षेत्र, उत्तरकाशी में गंगोत्री और यमुनोत्री, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ और बद्रीनाथ में जलवायु-अनुकूल स्कूल स्थापित किए हैं। यह कार्यक्रम तीन मुख्य स्तंभों – कैंपस, सहयोग और पाठ्यक्रम पर आधारित है। यह बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे, साझेदारियों और शैक्षिक सामग्री में जलवायु अनुकूलन को जोड़ता है।
    इस पहल के प्रभाव को समझने के लिए, एम्स ऋषिकेश द्वारा क्षेत्र के चार जलवायु-अनुकूल स्कूलों और नौ सामान्य स्कूलों में एक मूल्यांकन किया गया।

    अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों से बेहद मजबूत और स्पष्ट सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं, जो इस प्रकार हैं:
    • बेहतर स्वच्छता आदतें: अधिक छात्रों ने अपने स्वच्छता व्यवहार में सुधार दिखाया और हाथ धोने के नियमों का बेहतर पालन किया।
    • साबुन का अधिक उपयोग: स्कूलों में 94.1% छात्र साबुन और पानी से हाथ धोते हुए पाए गए।
    • बढ़ी हुई जागरूकता: छात्रों में हाथ धोने के सही तरीकों और स्वच्छता के नियमों के प्रति बेहतर समझ देखी गई।
    • स्वस्थ जीवन: 14.3% छात्रों ने जीवन की स्वास्थ्य-संबंधी गुणवत्ता को औसत से बेहतर बताया।
    • लगातार उपस्थिति: जलवायु-अनुकूल स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति लगातार अच्छी रही, जिससे उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आई।
    • इंफेक्शन के शून्य मामले: इन विशेष स्कूलों के छात्रों में किसी भी तरह का बैक्टीरियल या पैरासिटिक इंफेक्शन नहीं पाया गया।

    मूल्यांकन में यह भी देखा गया कि इन स्कूलों में स्वच्छता की आदतें अब छात्रों के खुद के स्वभाव में शामिल हो चुकी हैं। बच्चे अपने घरों में हाइजीन एंबेसडर बनकर उभरे हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि स्कूल पूरे समाज के व्यवहार को बदलने में एक उत्प्रेरक का काम कर रहे हैं।

    रेकिट के दक्षिण एशिया, एमईएनएआरपी और अफ्रीका के कम्युनिकेशन्स एंड कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर रवि भटनागर ने कहा, “रेकिट में हमारा मानना है कि स्वस्थ समाज का निर्माण रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कामों और व्यवहारों से होता है। जैसे-जैसे पर्यावरणीय चुनौतियां स्वास्थ्य, पानी की उपलब्धता और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण को प्रभावित कर रही हैं, बच्चों को इन वास्तविकताओं का सामना करने के लिए ज़रूरी ज्ञान और आदतों से लैस करना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। ‘डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के माध्यम से हमारा उद्देश्य समाज में एक स्थायी और सकारात्मक प्रभाव पैदा करना है, और ‘डेटॉल क्लाइमेट रेजिलीनिएंट स्कूल्स’ पहल इस सोच का एक बेहतरीन उदाहरण है। एम्स ऋषिकेश के निष्कर्ष बताते हैं कि कैसे सरल और लगातार किए गए प्रयासों से स्वास्थ्य के परिणामों को सुधारा जा सकता है और प्राकृतिक संसाधनों के अधिक ज़िम्मेदार उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह हर दिन अधिक से अधिक लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना ने कहा, “हमारे मूल्यांकन में उत्तराखंड के 13 सरकारी स्कूलों का अध्ययन किया गया, जिनमें चार डेटॉल जलवायु अनुकूल स्कूल और 9 सामान्य स्कूल शामिल थे। निष्कर्ष बताते हैं कि जिन स्कूलों में यह कार्यक्रम चलाया गया, वहां के छात्रों ने हाथ की स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूकता दिखाई, वे सुरक्षित पानी और पानी से होने वाली बीमारियों के बारे में अधिक जानते थे। साथ ही, उन्हें साफ पानी, बेहतर शौचालय सुविधाओं और अन्य जलवायु-अनुकूल उपायों का लाभ मिला। हमने छात्रों के स्वास्थ्य और उनके समग्र कल्याण में भी सकारात्मक सुधार देखा। यह अध्ययन बताता है कि डेटॉल जलवायु अनुकूल स्कूलों के तहत किए गए प्रयासों ने एक ऐसा स्कूली माहौल बनाने में मदद की है जो बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है और उनके सीखने के अवसरों को बढ़ाता है। हमने पाया कि बच्चे इन आदतों को न केवल स्कूलों में अपना रहे थे, बल्कि अपने परिवारों और समुदायों के साथ भी साझा कर रहे थे, जिसका मतलब है कि इसका असर क्लासरूम से बाहर तक फैल रहा है।”

  • उच्च व तकनीकी शिक्षा में सभी अटैचमेंट होंगे समाप्त: डॉ. धन सिंह रावत

    उच्च व तकनीकी शिक्षा में सभी अटैचमेंट होंगे समाप्त: डॉ. धन सिंह रावत

     

    देहरादून,

    प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सभी प्रकार की सम्बद्धताओं (अटैचमेंट) को समाप्त किया जाएगा। साथ ही विभिन्न संस्थानों एवं विभागों में प्रतिनियुक्ति पर गये कार्मिकों की भी वापसी सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को ठोस निर्देश दे दिए गए हैं।

    सूबे के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि दोनों विभागों में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थलों के बजाय अन्य महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं विभागों में सम्बद्ध अथवा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इससे महाविद्यालयों व पॉलीटेक्निक संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

    डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि विद्यालयी शिक्षा विभाग की तर्ज पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में भी अटैचमेंट व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वार्षिक स्थानांतरण से पहले सभी प्रकार की सम्बद्धताओं को समाप्त करते हुए संबंधित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थलों पर भेजा जाए।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी शिक्षण संस्थानों में मानव संसाधनों का संतुलित एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके तथा संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बन सके।

    डॉ रावत ने प्रतिनियुक्ति पर गये कार्मिकों की समीक्षा कर विभागीय अधिकारियों को आवश्यकतानुसार उन्हें शीघ्र मूल तैनाती पर वापस भेजने की कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।

     

  • शिक्षा विभाग में शिक्षकों व कार्मिकों के अटैचमेंट होंगे समाप्त: डाॅ. धन सिंह रावत

    शिक्षा विभाग में शिक्षकों व कार्मिकों के अटैचमेंट होंगे समाप्त: डाॅ. धन सिंह रावत

    देहरादून।
    विभिन्न विद्यालयों, विभागीय कार्यालयों व अन्य विभागों में सम्बद्ध सभी शिक्षकों को वापस अपने विद्यालयों में जाना होगा। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को आगामी 30 जून तक सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा उन शिक्षणेत्तर कार्मिकों के सम्बद्धीकरण आदेश भी निरस्त किये जायेंगे जो दूसरे कार्यालयों में तैनात हैं।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि राजकीय विद्यालयों में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये राज्य सरकार कड़े कदम उठाने से नहीं हिटकेगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लम्बे समय से विभिन्न स्कूलों, विभागीय कार्यालयों एवं अन्यत्र विभागों में सम्बद्ध अथवा प्रतिनियुक्ति पर गये शिक्षकों अपने मूल विद्यालय में जाकर बच्चों को पढ़ाना होगा। डाॅ. रावत ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को आगामी 30 जून तक सभी शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें तत्काल प्रभाव से विद्यालयों में भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जो शिक्षक अपने मूल तैनाती स्थल पर नहीं लौटे उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जायेगी। डॉ. रावत ने कहा कि अधिकांश अटैचमेंट केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए किए गए थे, लेकिन कई शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से अपने मूल विद्यालयों से दूर कार्यरत हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ा है और शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

    डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को शिक्षणेत्तर कार्मिकों के सभी सम्बद्धीकरण आदेश भी तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी विशेष प्रशासनिक अथवा शैक्षणिक आवश्यकता के तहत सम्बद्धीकरण की जरूरत पड़ती है तो उसे नए सिरे से निर्धारित अवधि के लिए किया जाएगा, जिसकी अधिकतम अवधि केवल एक शैक्षणिक सत्र होगी। डॉ. रावत ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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    *मिड-डे मील योजना में हेराफेरी की होगी जांच*
    विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने माध्यान भोजन योजना (मिड-डे मील) में हो रही फेराफेरी की शिकायतों का संज्ञान लेते हुये इसके जांच के आदेश दे दिये हैं। डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जनपद के साथ ही नैनीताल जिले के रामनगर, हल्द्वानी, पौड़ी में कोटद्वार, देहरादून में डोईवाला, रायपुर, विकासनगर व सहसपुर ब्लाॅक के विद्यालयों में मिल-डे मील में हो रही गड़बड़ी की जांच करने को कहा। डॉ. रावत ने कहा कि उन्हें पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों के माध्यम से मिड-डे मील योजना में गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में कुछ विद्यालयों द्वारा छात्र नामांकन संख्या के सापेक्ष अधिक खाद्यान्न की प्रविष्टियां दर्ज करने तथा खाद्यान्न की प्राप्ति और वास्तविक खपत में अंतर होने जैसी गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। डाॅ. रावत ने कहा कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

     

  • उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में इक्वेशन्स IAS के 21 विद्यार्थियों का चयन

    उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में इक्वेशन्स IAS के 21 विद्यार्थियों का चयन

     

    देहरादून, – उत्तराखंड के अग्रणी सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों में से एक इक्वेशन्स IAS ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (PCS) परीक्षा में अपने 21 विद्यार्थियों के चयन की गौरवपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। यह सफलता संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन एवं विद्यार्थियों की अथक मेहनत का प्रमाण है।

    चयनित अभ्यर्थियों में नैना अग्रवाल (स्टेट टैक्स ऑफिसर), सुनील सिंह राणा (स्टेट टैक्स ऑफिसर), अरुणिम रावत (डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट), रविन्स (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर), साहिल कुमार रजक (स्टेट टैक्स ऑफिसर), रूबी नेगी (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर), अपूर्वा थपलियाल (फाइनेंस ऑफिसर), आलोक भट्ट (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर), नीशू सैनी (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर), अमित चंद्र द्विवेदी (डिप्टी कलेक्टर), विनय कुमार आर्य (परिवहन विभाग), रीना कुमारी (स्टेट टैक्स ऑफिसर), आस्था अग्रवाल (स्टेट टैक्स ऑफिसर) सहित कई अन्य सफल अभ्यर्थी शामिल हैं।

    वर्ष 2009 में स्थापित इक्वेशन्स IAS पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एवं उत्तराखंड पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। संस्थान ने अपने उत्कृष्ट परिणामों, व्यक्तिगत मेंटरशिप एवं विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से प्रदेश और देशभर में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

    संस्थान का नेतृत्व इसके संस्थापक निदेशक कर रहे हैं—

    • दीपक दत्त ममगाईं – भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पूर्व अधिकारी तथा सिविल सेवा अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन एवं शिक्षण क्षेत्र में 23 से अधिक वर्षों का अनुभव।

    • कमल राणा – शिक्षा के विविध क्षेत्रों में 25 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाले शिक्षाविद्, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए समर्पित हैं।

    इस अवसर पर संस्थान के निदेशक दीपक दत्त ममगाईं ने कहा, “हमारे विद्यार्थियों की सफलता उनकी मेहनत, समर्पण और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। हम सभी चयनित अभ्यर्थियों एवं उनके परिवारों को हार्दिक बधाई देते हैं। हमारा उद्देश्य सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायक मेंटरशिप के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए तैयार करना रहा है।”

    इक्वेशन्स IAS सिविल सेवा परीक्षा के तीनों चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार (पर्सनैलिटी टेस्ट)—के लिए समग्र एवं व्यवस्थित तैयारी उपलब्ध कराता है।

    डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल

    इस उपलब्धि के साथ ही संस्थान ने अपने पैन-इंडिया ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य देशभर के अभ्यर्थियों तक गुणवत्तापूर्ण सिविल सेवा शिक्षा पहुंचाना है।

    इस पहल के अंतर्गत संस्थान ने अत्याधुनिक डिजिटल स्टूडियो, हाइब्रिड क्लासरूम इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइव एवं रिकॉर्डेड ऑनलाइन कक्षाएं, इंटरैक्टिव ऑनलाइन मेंटरशिप एवं डाउट सपोर्ट तथा व्यापक टेस्ट सीरीज़ एवं अध्ययन सामग्री विकसित की हैं।

    सिविल सेवा अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से इक्वेशन्स IAS ने 24 फरवरी 2026 से अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 60 दिवसीय निःशुल्क जनरल स्टडीज़ (GS) क्रैश कोर्स प्रारंभ किया है। इस पहल के माध्यम से प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों के लिए उपयोगी विषयों पर विशेषज्ञ फैकल्टी द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। देशभर के हजारों अभ्यर्थी इस निःशुल्क शैक्षणिक अभियान का लाभ उठा रहे हैं।

    सुलभ शिक्षा के अपने संकल्प के तहत संस्थान ने पिछले तीन महीनों में हजारों अभ्यर्थियों को निःशुल्क ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री एवं मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया है।

    संस्थान की डिजिटल पहल को विद्यार्थियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इक्वेशन्स IAS का आधिकारिक यूट्यूब चैनल 11,500 से अधिक सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर चुका है तथा देश के विभिन्न राज्यों से अभ्यर्थी निरंतर इस शैक्षणिक समुदाय से जुड़ रहे हैं।

    अनुभवी शिक्षकों की मजबूत टीम, व्यवस्थित पाठ्यक्रम, आधुनिक शिक्षण पद्धति और विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ इक्वेशन्स IAS भविष्य में भी ऐसे सफल प्रशासनिक अधिकारियों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो राष्ट्र निर्माण एवं जनसेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

     

    इक्वेशन्स IAS
    प्रथम तल, अंबिका कॉम्प्लेक्स, जीएमएस रोड, बल्लूपुर चौक, देहरादून
    ईमेल: info@equations.co.in
    वेबसाइट: www.equations.co.in

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां सीखेंगे तकनीकी संस्थानों के छात्र: डॉ धन सिंह रावत

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां सीखेंगे तकनीकी संस्थानों के छात्र: डॉ धन सिंह रावत

     

    देहरादून,

    प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों एवं अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं अपने पाठ्यक्रम के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और कोडिंग की बारीकियां भी सीखेंगे। इसके लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने कोडयोगी फाउंडेशन तथा कम्प्यूटर एंड लर्न फाउंडेशन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

    सोमवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत राज्य के पॉलीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को एआई के मूलभूत सिद्धांतों, कोडिंग, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    इस अवसर पर डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को नई तकनीकों में दक्ष बनाने के साथ-साथ उनकी समस्या समाधान क्षमता (प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल) और नवाचार (इनोवेशन) की सोच को भी विकसित करेगी।

    उन्होंने बताया कि विद्यार्थी अपने स्मार्टफोन के माध्यम से, अपनी भाषा में और बिना किसी शुल्क के यह प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को विभाग की ओर से दो अकादमिक क्रेडिट भी प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए किसी अतिरिक्त कंप्यूटर लैब, आधारभूत संरचना अथवा शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। कोडयोगी फाउंडेशन कार्यक्रम का वित्तपोषण एवं संचालन स्वतंत्र रूप से करेगा, जबकि विभाग राज्य के सभी पॉलीटेक्निक संस्थानों तक इसकी प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करेगा।

    समझौता ज्ञापन के अवसर पर कोडयोगी फाउंडेशन के संस्थापक प्रशांत चौधरी ने कहा कि कोडयोगी फाउंडेशन की यात्रा उत्तराखंड से शुरू हुई, यहां के पॉलीटेक्निक छात्रों फाउंडेशन के साथ तकनीकी कौशल के गुर सीखे और आज वह मल्टीनेशनल कंपनियों में बड़े पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि यदि आपके पास एक स्मार्टफोन और सीखने की जिज्ञासा है, तो वही पर्याप्त है।

    बैठक में सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, कुलपति तकनीकी विश्वविद्यालय प्रो. तृप्ता ठाकुर, निदेशक तकनीकी शिक्षा देशराज, उप सचिव ब्योमकेश दुबे, सचिव यूबीटीआर डॉ. मुकेश पांडेय, कोडयोगी फाउंडेशन के संस्थापक प्रशांत चौधरी, कम्प्यूटर एंड लर्न फाउंडेशन के निदेशक साई प्रसाद साले सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।