Category: शिक्षा

  • राज्य में शत-प्रतिशत लागू होंगे एनईपी-2020 के प्रावधानः डाॅ. धन सिंह रावत

    राज्य में शत-प्रतिशत लागू होंगे एनईपी-2020 के प्रावधानः डाॅ. धन सिंह रावत

    देहरादून,
    सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आज राज्य उच्च शिक्षा परिषद की 13वीं बैठक आयोजित की गई। जिसमें एक दर्जन से अधिक प्रस्ताव पारित किये गये तथा 12वीं बैठक में लिये गये निर्णयों का अनुमोदन दिया गया। उच्च शिक्षा के अंतर्गत एनईपी-2020 के प्रावधानों को शत-प्रतिशत लागू करने की सहमति बनी। इसके अलावा देवभूमि उद्यमिता कार्यक्रम, संकाय विकास कार्यक्रम, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पीएम-ऊषा, निजी विश्वविद्यालय माॅडल अधिनियम एवं समर्थ पोर्टल के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।

    सचिवालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित राज्य उच्च शिक्षा परिषद की 13वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुये उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि परिषद की बैठक में डेढ़ दर्जन प्रस्तावों पर चर्चा की गई, जिसमें विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण, कैरियर एडवांसमेंट स्कीम, भारत दर्शन योजना हेतु प्रतिभागियों का चयन, महाविद्यालयों में नवीन पाठ्यक्रमों का संचालन, परीक्षा परीणामों संबंधी शिकायतों का समयबद्ध निवारण, स्वायत्तशासी एवं आदर्श महाविद्यालयों के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का निरीक्षण, प्राध्यापकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक उन्नयन हेतु प्रतिभागिता, संचालित पाठ्यक्रमों का निर्माण एवं संचालन, एंटी ड्रग सेल का गठन आदि पर चर्चा के उपरांत स्वीकृति प्रदान की गई।

    डाॅ. रावत ने बताया कि परिषद की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जायेगी। जिसमें एनईपी-2020 के सभी प्रावधानों, महाविद्यालयों को स्वायत्तता प्रदान करने, शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही परीक्षा की सुचिता बनाये रखने, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में सांस्कृतिक एवं खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन करने, देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत प्रशिक्षण देने, संकाय विकास कार्यक्रम व भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित पाठ्यक्रम लागू करने के अलावा शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति अभियान चलाये जाने पर अहम निर्णय लिये जायेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि आगामी छह माह में प्रत्येक विश्वविद्यालय 5-5 व महाविद्यालय 2-2 सेमिनार आयोजित करेंगे, जिनके विषय अलग-अलग होंगे। जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद एवं प्रदेश के मंत्री तथा दो-दो विषय विशेषज्ञ आमंत्रित किये जायेंगे। इसके अलावा प्रत्येक विश्वविद्यालय व महाविद्यालय में मां सरस्वती एवं विवेकानंद की मूर्ति स्थापित की जायेगी। साथ ही आगामी 10 से 15 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थानों में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जायेगा। जिसमें प्रत्येक शिक्षण संस्थान को अपने संस्थान के आस-पास तिरंगा यात्रा निकालनी होगी, जिसमें छात्रों के साथ ही शिक्षक व कर्मचारी भी प्रतिभाग करेंगे

    बैठक में उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डा. देवेन्द्र भसीन, जयपाल चैहान, पद्मभूषण डाॅ. अनिल जोशी, सचिव उच्च शिक्षा बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, कुलपति उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय प्रो. तृप्ता ठाकुर, कुलपति एच.एन.बी. चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो. भानु दुग्गल, कुलपति श्रीदेव सुमन विश्वविद्याल प्रो. अम्बरीश महाजन, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, नोडल पीएम-ऊषा डाॅ. अनीता रावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • श्रीनगर में शिक्षा मंत्री डॉ रावत ने वितरित किये नव चयनित शिक्षकों को नियुक्त पत्र

    श्रीनगर में शिक्षा मंत्री डॉ रावत ने वितरित किये नव चयनित शिक्षकों को नियुक्त पत्र

     

    श्रीनगर/देहरादून,

    प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज गढ़वाल मंडल के अंतर्गत चयनित 69 सहायक अध्यापक (एल.टी.) (विशेष शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने सभी नवनियुक्त शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

    विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा श्रीनगर में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में आज उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित गढ़वाल मंडल के 69 सहायक अध्यापक (एल.टी.) (विशेष शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें पौड़ी जनपद में 21, चमोली व देहरादून में 9- 9, उत्तरकाशी 8, रुद्रप्रयाग 4, हरिद्वार 1 तथा टिहरी गढ़वाल में 17 नव चयनित शिक्षक शामिल हैं।

    इस अवसर परडॉ. रावत ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि वे समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों के कंधों पर उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि सभी शिक्षक पूर्ण संवेदनशीलता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में योगदान देंगे।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समावेशी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विद्यालयों के आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, कौशल विकास तथा मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त विशेष शिक्षक दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

    इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा विभाग के मंडल स्तरीय अधिकारी सहित नव नियुक्त सहायक अध्यापक एलटी (विशेष शिक्षा) व उनके परिजन उपस्थित रहे।

     

  • उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव

    उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव

    देहरादून।

    उत्तराखण्ड सरकार, राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग के गठन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

    संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

    प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार, प्रशासन तथा तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    *देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।*

     

  • उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा विकसित भारत-2047 को लेकर करें सेमिनार

    उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा विकसित भारत-2047 को लेकर करें सेमिनार

     

    देहरादून,
    प्रदेश के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार पर मिलकर कार्य करेंगे। साथ ही विकसित भारत-2047 की थीम पर अलग-अलग विषयों को लेकर सेमिनार भी आयोजित करेंगे। सामाजिक दायित्वों के अंतर्गत प्रत्येक विश्वविद्यालय पांच-पांच गांव गोद लेंगे तथा उनमें मूलभूत सुविधाओं के साथ ही नशा मुक्ति एवं स्वच्छता कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे।

    सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित सभागार में आयोजित निजी विश्वविद्यालयों की बैठक में एनईपी-2020 के प्रावधानों के तहत शोध एवं नवाचार के क्षेत्रों में मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया। जिसमें राज्य विश्वविद्यालय एवं निजी विश्वविद्यालय आपसी समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। इसके अलावाा निजी विश्वविद्यालय भी खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन करेंगे, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपनी संस्कृति के संरक्षण के साथ ही अपनी खेल प्रतिभा को प्रदर्शित करने का मौका मिल सकेगा। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी है कि सभी निजी व राज्य विश्वविद्यालय विकसित भारत-2047 की थीम पर आधािरत विभिन्न विषयों का चयन कर दो-दो सेमिनार आयोजित करेंगे। जिसमें छात्र-छात्राओं के साथ ही वक्ता के रूप में विषय विशेषज्ञों, पद्मश्री प्राप्त व्यक्तियों के अलावा राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्रीगणों, सांसदगणों, राज्य के मंत्रीगणों व अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जायेगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य एवं निजी विश्वविद्यालय अपने सामाजिक दायित्वों के तहत अपने आसपास के पांच-पांच गांवों को गोद लेकर उनको आदर्श गांवों के रूप में विकसित करेंगे। इसके अलावा अपने निकटतम एक आंगनवाड़ी केन्द्र अथवा राजकीय प्राथमिक को गोद लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायेंगे। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के साथ ही रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को संचालित करने व एनईपी-2020 के प्रावधानों के तहत स्थानीय संस्कृति, भाषा एवं धरोहरों को संरक्षित करते हुये उन्हें पाठ्यक्रमों में शामिल किया जायेगा। निजी विश्वविद्यालयों की समस्याओं एवं सुझावों को सरकार तक पहुंचाने के लिये शासन स्तर पर एक आॅनलाइन पोर्टल बनाये जाने पर भी सहमति बनी, ताकि निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को छोटी-छोटी बातों के लिये शासन के चक्कर काटने के बजाय सीधे आॅनलाइन माध्यम से पोर्टल पर अपने समस्याओं व सुझावों को दर्ज किया जा सके।

    बैठक में उच्च शिक्षा सचिव बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के चैयरमैन जितेन्द्र जोशी, क्वांटम विश्वविद्यालय के चैयरमैन अजय गोयल, हरिद्वार विश्वविद्यालय के चैयरमैन एस.के. गुप्ता, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, पतंजलि विश्वविद्यालय, श्रीगुरूराम राय विश्वविद्यालय, स्वामीराम हिमालयन विश्वविद्यालय यूपीएस विश्वविद्यालय, आईएमएस विश्वविद्यालय, डीआईटी विश्वविद्यालय सहित दो दर्जन से अधिक निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

     

  • प्रत्येक जनपद में स्थापित होंगी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियांः डॉ. धन सिंह रावत

    प्रत्येक जनपद में स्थापित होंगी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियांः डॉ. धन सिंह रावत

     

     

    देहरादून, ।सूबे में सहकारिता आंदोलन को अधिक सशक्त, आधुनिक एवं जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक जनपद में क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी स्थापित की जाएगी। साथ ही प्रत्येक मंडल में दो-दो क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी विकसित कर सहकारिता सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक लोगों को सुलभ एवं पारदर्शी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

    सूबे के सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आजयमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास पर सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक जनपद में क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी स्थापित करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने मण्डल स्तर पर दो-दो क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी खोलने को भी अधिकारियों को कहा। डाॅ. रावत ने कहा कि जनपद स्तर पर क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी स्थापित होने से प्रदेश में सहकारिता सेवाओं को विस्तार मिलेगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को सुलभ एवं पारदर्शी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने प्रदेशभर की सभी सहकारी बैंक शाखाओं एवं सहकारी समितियों के भवनों को एक समान रंग एवं स्वरूप प्रदान करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये ताकि सहकारिता संस्थाओं की एक विशिष्ट पहचान विकसित हो सके। उन्होंने सभी सहकारी समितियों की भूमि की रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से करने के निर्देश भी दिये ताकि भविष्य में किसी प्रकार के स्वामित्व संबंधी विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा करते हुये डाॅ. रावत ने प्रशासक कार्यकाल की प्रगति, अपेक्स (शीर्ष) सहकारी संस्थाओं के कार्य, नई शीर्ष संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया, भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की उपलब्धि तथा पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की प्रगति रिपोर्ट भी अधिकारियो से तलब की। डाॅ. रावत ने सभी विभागीययोजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित को अधिकारियों को निर्देश दिये साथ ही लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा प्रत्येक स्तर पर नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाय। उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग को प्रदेश के आर्थिक विकास एवं ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय अधिकारी नवाचार, सुशासन एवं बेहतर कार्य संस्कृति के साथ कार्य करें, जिससे सहकारिता आंदोलन को नई गति मिल सके और आमजन को योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।

    बैठक में सचिव सहकारिता डाॅ. इकबाल अहमद, निबंधक सहकारिता डाॅ. मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक ईरा उप्रेती, आनंद शुक्ला, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जबकि सभी जनपदों के जिला सहायक निबंधक ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।

     

  • नीट 2026 में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) उत्तराखंड का दबदबा: देहरादून की दिव्यांशी चौधरी ने हासिल की (AIR) 605, 35 छात्र बने टॉप स्कोरर

    नीट 2026 में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) उत्तराखंड का दबदबा: देहरादून की दिव्यांशी चौधरी ने हासिल की (AIR) 605, 35 छात्र बने टॉप स्कोरर

     

    देहरादून, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) के छात्र दिव्यांशी चौधरी ने नीट UG 2026 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 605 हासिल कर किया है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट शिक्षा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से छात्रों के भविष्य को संवारने की दिशा में एईएसएल की प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित करती है।

    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित NEET UG 2026 के परिणामों में दिव्यांशी चौधरी ने 720 में से 667 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 605 हासिल की। वहीं, नैशा ध्यानी ने 655 अंक के साथ AIR 1130, आरव सैनी ने 648 अंक के साथ AIR 1579, अदिति सिंह ने 640 अंक के साथ AIR 2287 तथा श्रुति ने 619 अंक प्राप्त कर AIR 5283 हासिल की।

    नीट 2026 में इस वर्ष भी आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में अपनी अग्रणी पहचान को और मजबूत किया है। इस वर्ष संस्थान के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार सफलता हासिल की है। आकाश के 4 छात्रों ने ऑल इंडिया टॉप 10, 18 छात्रों ने टॉप 50 तथा 41 छात्रों ने टॉप 100 में स्थान बनाया है। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुभवी फैकल्टी, वैज्ञानिक शिक्षण पद्धति, व्यापक अध्ययन सामग्री, नियमित टेस्ट और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की मजबूत व्यवस्था को दर्शाती है।

    अपनी सफलता पर छात्रों ने कहा, “नीट UG 2026 में AIR हासिल करना मेरे लिए बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। इस सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर मेहनत और लगातार सीखते रहने की आवश्यकता थी। आकाश के शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मेरे कॉन्सेप्ट मजबूत किए, मेरी तैयारी की रणनीति को बेहतर बनाया और पूरे सफर के दौरान मुझे प्रेरित रखा। मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।”

    इस उपलब्धि पर डी के मिश्रा – क्षेत्रीय निदेशक, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) ने कहा, “हम दिव्यांशी चौधरी को नीट UG 2026 में AIR 605 प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हैं। यह सफलता छात्र की कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प तथा अभिभावकों और शिक्षकों के सहयोग का परिणाम है। एईएसएल का हमेशा प्रयास रहा है कि छात्रों को मजबूत शैक्षणिक आधार, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।”

    आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड ने वर्षों से नीट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपनी परंपरा को कायम रखा है। पिछले एक दशक में आकाश के छात्रों ने 13 बार AIR 1 हासिल किया है। इसी अवधि में ऑल इंडिया टॉप 10 रैंक में 64 प्रतिशत तथा ऑल इंडिया टॉप 100 रैंक में 50 प्रतिशत स्थान आकाश के छात्रों ने प्राप्त किए हैं।

  • बीज बम” अभियान पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम : डॉ. धन सिंह रावत

    बीज बम” अभियान पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम : डॉ. धन सिंह रावत

     

    देहरादून,

    विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज राजीव गांधी नवोदय विद्यालय स्थित वर्चुअल स्टूडियो से राज्यव्यापी “बीज बम” अभियान का शुभारंभ किया। पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय फलदार वृक्षों के संवर्धन, जैव विविधता के संरक्षण तथा वन्यजीव-मानव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रदेश के 1,050 से अधिक विद्यालयों में किया गया, जिसमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

    बीज बम संवाद कार्यक्रम-2026 के अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि “बीज बम” अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि स्थानीय फलदार प्रजातियों के बीजों के माध्यम से हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त खाद्य उपलब्ध कराने का यह अद्वितीय प्रयास, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।

    उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि प्रत्येक छात्र-छात्रा कम से कम दो बीज बम तैयार कर उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित करें तथा अपने परिवार और समाज को भी इस अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जन-जन का अभियान बनेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।

    विभागीय मंत्री डॉ रावत ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे जीवन मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर प्रकृति, कृषि और समाज से जुड़ाव का माध्यम भी बननी चाहिए।

    डॉ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को आगामी 16 जुलाई को हरेला पर्व के अवसर पर विभाग के सभी कार्यालयों, विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में “बीज बम” अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें स्थानीय फलदार प्रजातियों के बीजों को प्राथमिकता देते हुए अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से जलवायु परिवर्तन, वन संरक्षण एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक रहने तथा वन विभाग के सहयोग से संचालित संरक्षण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग भविष्य में नियमित रूप से विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित करेगा, ताकि विद्यार्थियों को उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण एवं समसामयिक विषयों की व्यापक जानकारी मिल सके।

    कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने “बीज बम” अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा उत्तराखंड को अधिक हरित, समृद्ध एवं पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का सफल आयोजन Valuable Edutainment Pvt. Ltd. द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में कंपनी के निदेशक संजय पीर, मानसी शर्मा एवं रवि झा सहित समस्त टीम का महत्वपूर्ण योगदान एवं पूर्ण सहयोग रहा। सभी के समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम का वर्चुअल स्टूडियो के माध्यम से प्रदेशभर के विद्यालयों में सफलतापूर्वक सीधा प्रसारण किया गया।

    इस अवसर पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सिमल्टी, बेसिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून गोविंद जायसवाल, हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान ”जाड़ी“ उतरकाशी के संस्थापक द्वारिका प्रसाद सेमवाल सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

     

  • नन्हे बच्चों के सपनों को मिलेगी वैश्विक उड़ान : कै. मुकुल महेंद्रु

    नन्हे बच्चों के सपनों को मिलेगी वैश्विक उड़ान : कै. मुकुल महेंद्रु

     

    देहरादून,  – किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। जीवन के शुरुआती वर्ष ही बच्चे के व्यक्तित्व, सोच, व्यवहार और सीखने की क्षमता की नींव रखते हैं। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से द पॉली किड्स परिवार अपनी नई एवं प्रीमियम प्री-स्कूल इकाई ‘सर्कल ऑफ टॉडलर्स’ पुरकुल रोड, बगराल गाँव, देहरादून में भव्य शुभारंभ होने जा रहा है।

    पॉली किड्स परिवार के संस्थापक कैप्टन मुकुल महेंद्रु ने आज मसूरी रोड स्थित पॉली किड्स में आयोजित मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह संस्थान केवल बच्चों को पढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास, रचनात्मकता, जिज्ञासा और आत्मविश्वास को विकसित करने वाला एक आधुनिक शिक्षण केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने बताया कल शुरू होने जा रहे कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में महापौर सौरभ थपलियाल तथा विधायक श्रीमती सविता कपूर मुख्य रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में द पॉली किड्स परिवार के निदेशकगण, प्रधानाचार्य, शिक्षाविद्, अभिभावक, नन्हे विद्यार्थी तथा शहर के अनेक गणमान्य नागरिक भी सहभागिता करेंगे। शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आधुनिक प्री-स्कूल बच्चों की शुरुआती शिक्षा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    प्रारंभिक शिक्षा का आधुनिक स्वरूप आज के समय में शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है। बच्चों में संवाद कौशल, रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक संतुलन का विकास भी उतना ही आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सर्कल ऑफ टॉडलर्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। मीडिया से बातचीत करते हुए चेयरपर्सन रंजना महेंद्रु ने बताया कि विद्यालय में फिनलैंड एवं सिंगापुर आधारित अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम अपनाया गया है, जिसे विश्व के सबसे प्रभावी प्रारंभिक शिक्षा मॉडलों में माना जाता है। यहाँ बच्चों को गतिविधि आधारित, अनुभवात्मक और खेल-खेल में सीखने की पद्धति से शिक्षित किया जाएगा, जिससे उनमें सीखने के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित हो सके। डिजिटल संसाधनों का उपयोग बच्चों की आयु और आवश्यकता के अनुरूप किया जाएगा, ताकि तकनीक उनके विकास की सहायक बने। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पूर्णतः वातानुकूलित कक्षाएँ, सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल फर्नीचर, आधुनिक शिक्षण सामग्री, रंग-बिरंगे शिक्षण उपकरण तथा आकर्षक प्ले ज़ोन विकसित किए गए हैं। प्रत्येक व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और सीखने की सहजता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

    अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में सीखने का आनंद विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रशिक्षित एवं अनुभवी शिक्षकों की समर्पित टीम शामिल है। शिक्षक केवल पढ़ाने की भूमिका तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि प्रत्येक बच्चे की रुचि, क्षमता और विकास की गति को समझते हुए व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी प्रदान करेंगे। विद्यालय का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करे। रंग-बिरंगे टेडी मैस्कॉट्स, कठपुतली पात्र और मनोरंजक गतिविधियाँ नन्हे मेहमानों का स्वागत करेंगी। अभिभावकों को विद्यालय की आधुनिक सुविधाओं और शिक्षण प्रणाली से परिचित कराने के लिए विशेष परिसर भ्रमण भी कराया जाएगा। समारोह के दौरान आयोजित होने वाली विशेष बेबी कॉन्टेस्ट बच्चों के आकर्षण का केंद्र होगी। इसमें विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों को रोचक श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा तथा आकर्षक उपहार एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे I विद्यालय की चेयरपर्सन ने कहा कि “हर बच्चा अपने भीतर अनंत संभावनाएँ लेकर जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि द पॉली किड्स परिवार सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार के माध्यम से समाज को बेहतर शैक्षिक वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है तथा यह नई इकाई उसी संकल्प का विस्तार है।

  • शिक्षा विभाग की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल ने वैश्विक मंच पर फहराया परचम

    शिक्षा विभाग की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल ने वैश्विक मंच पर फहराया परचम

     

    देहरादून,
    राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा विकसित ‘बिल्डिंग फ्यूचर-रेडी टीचर थ्रो एआई’ परियोजना को वैश्विक मंच पर खूब सराहना मिली। इस परियोजना को यूनेस्को के एआई फाॅर एजुकेशन अवार्ड-2026 के टीचर ट्रेनिंग अवार्ड वर्ग में विश्व की शीर्ष छह परियोजनाओं में शामिल किया गया, जिसकी घोषणा स्विट्जरलैण्ड के जिनेवा में आयोजित एआई फाॅर गुड ग्लोबल समिट-2026 में की गई। आगामी 1 सितम्बर, 2026 से यह परियोजना ग्लोबल इम्पावरमेंट प्रोग्राम का हिस्सा बनेगी ताकि अन्य देश भी अपने यहां शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ बना सके। एससीईआरटी द्वारा तैयार डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल विश्व की शीर्ष परियोजनाओं में चयनित होना प्रदेश के लिये ऐतिहासिक व गौरव का क्षण है।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयी शिक्षा में नवाचार, डिजिटल तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण व्यवस्था को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज एससीईआरटी की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रदेश के हजारों शिक्षकों, एससीईआरटी की टीम, विषय विशेषज्ञों एवं शिक्षा विभाग के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है। डाॅ. रावत ने बताया कि यह दूसरी बार है जब एससीईआरटी के एआई आधारित शिक्षक प्रशिक्षण माॅडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला है। इससे पहले यूनेस्को-आईआईटीई द्वारा प्रकाशित वैश्विक केस स्टडी में भी राज्य के एआई एवं डिजिटल तकनीक आधारित नवाचारों को स्थान दिया गया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था की दिशा में उत्तराखण्ड के प्रयासों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

    डाॅ. रावत ने बताया कि एससीईआरटी द्वारा विकसित ‘फंडामेंटल्स आॅफ एआई एंड आईसीटी टूल फाॅर स्कूल टीचर्स’ आॅनलाइन कोर्स ने राज्य में डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण को नई दिशा प्रदान की। इस अभिनव कार्यक्रम के जरिये प्रदेशभर के शिक्षकों को एआई, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, डिजिटल शिक्षण, आॅनलाइन मूल्यांकन तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके तहत 49 हजार से अधिक शिक्षकों का पंजीकरण कराया गया जबकि 47 हजार से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण पूर्ण कर प्रमाण पत्र प्राप्त किये। राज्य के लगभग 97 फीसदी विद्यालय इस कार्यक्रम से जुडे़, जिसके चलते 15 हजार से अधिक विद्यालयों तक डिजिटल प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित हुई। जिसकी प्रगति की ई-सृजन एआई चैटबाॅट तथा विद्या समीक्षा केन्द्र डैशबोर्ड के माध्यम से रियल टाइम निगरानी की गई।

    *बयान*
    एससीईआरटी द्वारा विकसित एआई शिक्षक प्रशिक्षण आगामी 1 सितम्बर, 2026 से यूनेस्को के ग्लोबल इम्पावरमेंट प्रोग्राम का हिस्सा बनेगी, ताकि अन्य देश भी अपने यहां शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ बना सकेंगे। वैश्विक स्तर पर एससीईआरटी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षक प्रशिक्षण तथा समावेशी शिक्षा माॅडल वैश्विक स्तर पर भी प्रभावी पहचान बना रहे हैं।

     

  • सूबे में गठित होंगे आठ नये सहकारी संघः डाॅ. धन सिंह रावत

    सूबे में गठित होंगे आठ नये सहकारी संघः डाॅ. धन सिंह रावत

     

    देहरादून,
    सूबे में सहकारिता के विस्तार को आठ नये सहकारी संघ गठित किये जायेंगे। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। जनपद स्तर के बाद अब विधानसभा क्षेत्रों में भी सहकारिता मेलों का आयोजन किया जायेगा, ताकि किसानों, काश्तकारों, कारीगरों व महिला स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध हो सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

    केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य आज सहकारिता विभाग द्वारा देहरादून में ‘सहकार मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सूबे के सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेशभर के बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के अध्यक्षों, सहकार बंधुओं एवं सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विगत पांच वर्षों में सहकारिता की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

    कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि डाॅ. रावत ने कहा कि सूबे में सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुये हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को सहकारिता से जोड़ने के लिये और अधिक प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिये शीघ्र ही प्रदेश में आठ नये सहकारी संघ गठित किये जायेंगे। जिनमें लखपति दीदी फेडरेशन, महिला स्वयं सहायता समूह फेडरेशन, वन पंचायत फेडरेशन, स्वास्थ्य फेडरेशन, प्लंबर एवं जल कार्यकर्ता फेडरेशन, भारत टैक्सी फेडरेशन, एविएशन फेडरेशन तथा यूथ फेडरेशन शामिल हैं। डाॅ. रावत ने कहा कि 21 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक संगठित व आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महिला स्वयं सहायता समूह फेडरेशन गठित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा लखपति दीदी फेडरेशन के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा। वन पंचायत फेडरेशन के माध्यम से वन आधारित आजीविका, नर्सरी विकास एवं ग्रामीण किसानों को जोड़ा जाएगा। प्लंबर फेडरेशन राज्य के कुशल कारीगरों को संगठित कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। भारत टैक्सी फेडरेशन के माध्यम से प्रदेश के लगभग 47 हजार वाहन चालक आधुनिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे, जबकि यूथ फेडरेशन का लक्ष्य एक वर्ष में एक लाख युवाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। इस अवसर पर डाॅ. रावत ने कहा कि जिला स्तर पर आयोजित सहकारिता मेलों की सफलताओं को देखते हुये अब सभी विधानसभा क्षेत्रों में मेलाओं आयोजन किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

    इस अवसर पर घनसाली विधायक शक्तिलाल शाह ने राज्य में सहकारिता क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व कार्यों एवं नवाचारों की सराहना करते हुए सहकारिता मंत्री का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि सहकारी मेलों के आयोजन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष मातवर सिंह रावत एवं जिला सहकारी बैंक टिहरी के पूर्व अध्यक्ष सुभाष रमोला ने केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के पाँच वर्ष पूर्ण होने एवं प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति एवं उपलब्धियों पर अपने विचार रखे। जबकि निबंधक सहकारिता डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने विभागीय योजनाओं एवं सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता के माध्यम से सहकारिता को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।

    कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से आए प्रतिनिधियों के साथ ही नैनीताल, ऊधम सिंह नगर एवं हरिद्वार जनपदों की सहकारी समितियों के सहकार बंधुओं ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। सहकारिता मंत्री डाॅ. रावत ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें विभाग की भावी कार्ययोजना में शामिल करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन सहकारिता सप्ताह के नोडल अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक, प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियनएम.पी. त्रिपाठी ने किया, जबकि संयुक्त निबंधक रमिंद्री मंद्रवाल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

    कार्यक्रम में उप निबंधक सहकारिता, समस्त जिला सहायक निबंधक, विभिन्न सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, सचिव, सहकार बंधु तथा विभागीय अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    *बाॅक्स*

    *सूबे की 13 उत्कृष्ट सहकारी समितियों को किया सम्मानित*
    कार्यक्रम में विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के हाथों प्रदेशभर की 13 उत्कृष्ट सहकारी समितियों को प्रशस्ति प्रत्र देकर सम्मानित किया गया। जिसमें एमपैक्स बागेश्वर, पनुवानौला (अल्मोडा), गडोलिया (टिहरी), कुमौड (पिथौरागढ़), चम्पावत, कुवंरपुर (नैनीताल), गोपेश्वर (चमोली), पनियाला (हरिद्वार), सुखरो (पौड़ी), विकासनगर (देहरादून), नौगांव (उत्तरकाशी), जसपुर (ऊधमसिंह नगर) तथा अगस्त्यमुनि (रूद्रप्रयाग) शामिल है। इसके अलावा नाबार्ड द्वारा चयनित उत्कृष्ट बैंकों जिला सहकारी बैंक चमोली व पौड़ी को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने पर दुधारखाल बहुउद्देशीय सहकारी समिति (पौड़ी गढ़वाल) तथा सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), पौड़ी को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड आवास एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड, काशीपुर द्वारा जनपद ऊधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ एवं देहरादून में लगभग 10 करोड़ 24 लाख 35 हजार रुपये की लागत से निर्मित विभिन्न कार्यालय भवनों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया गया। इसके अलावा इस अवसर पर विभागीय मंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूह उज्ज्वल, होशियारी एवं माता वैष्णवी को पाँच-पाँच लाख रुपये के ब्याज मुख्य पर ऋण के चेक प्रदान किये। इसके अलावा गुजारना बहुउद्देशीय सहकारी समिति एवं सरोना समिति को माइक्रो एटीएम भी वितरित किये गये।