। देहरादून, ।
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परिसर संस्थान, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (WIT) में ‘फ्यूचर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफलतापूर्वक समापन शुक्रवार को संपन्न हुआ।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के प्रख्यात विशेषज्ञों ने संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम परिवर्तनों तथा उनके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तृत जानकारी साझा की। विशेष रूप से 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक तथा दूरसंचार प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
यह कार्यक्रम ए.एन.आर.एफ. (ANRF), भारत सरकार तथा वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर मुख्य संरक्षक के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार पांडा, निदेशक, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, डॉ. देवाशीष घोष, आईआईटी रुड़की, अश्विन शर्मा, आईआईटी रोपड़, डॉ. आशीष बगवाड़ी, कार्यक्रम समन्वयक एवं डीन (एकेडमिक एवं रिसर्च) सहित उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी इंजिनियरिंग संस्थानों के शिक्षकगण एवं विभागीय संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर आईआईटी रुड़की के डॉ. देवाशीष घोष ने अपने व्याख्यान में कंप्रेसिव सेंसिंग के वायरलेस कम्युनिकेशन में उपयोग तथा 5जी एवं 6जी जैसी भावी तकनीकों पर प्रकाश डाला। वहीं आईआईटी रोपड़ के अश्विनी शर्मा द्वारा ‘वायरलेस कम्युनिकेशन में ऊर्जा दक्षता’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
द्वितीय दिवस पर डीआरडीओ की वैज्ञानिक ‘एफ’ डॉ. सुहासिनी ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में संचार प्रणालियों एवं रक्षा उपकरणों के उपयोग पर प्रकाश डाला। इसी दिन गुरुकुल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. मयंक अग्रवाल ने ब्लॉकचेन तकनीक एवं साइबर सुरक्षा के आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
तृतीय दिवस पर गुरुकुल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. विपुल शर्मा ने फ्यूचर कम्युनिकेशन हेतु एंटीना तकनीक में हो रहे सुधारों पर विचार साझा किए। साथ ही यू-सैक (USAC) की वैज्ञानिक डॉ. अरुणा रानी द्वारा सैटेलाइट कम्युनिकेशन एवं ड्रोन तकनीक के भविष्यगत उपयोगों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
चतुर्थ दिवस में इंडस्ट्री विशेषज्ञ इंजी. भूपेन्द्र सिंह एवं गौरव (रोबोटोनिक्स, इंदौर) द्वारा रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), मशीन लर्निंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एम्बेडेड सिस्टम्स में उपयोग पर जानकारी दी गई। साथ ही प्रतिभागियों को रास्पबेरी पाई पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
अंतिम दिवस पर टैटकॉस, बेंगलुरु के इंजी. विशाल द्वारा 5जी, 6जी एवं अंडरवाटर कम्युनिकेशन तकनीकों पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि टैटकॉस द्वारा निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग चंद्रयान-1 मिशन में किया जा चुका है।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय, निदेशक डब्ल्यूआईटी डॉ. मनोज कुमार पांडा, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आशीष बगवाड़ी, डीन (एकेडमिक एंड रिसर्च), विभागाध्यक्ष (इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन) श्री के.सी. मिश्रा, सहायक प्राध्यापक, श्री हितांशु कटियार, श्री अंशु सिंह, श्रीमती मंजू सती, श्रीमती सोनाली तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन विभाग के संकाय सदस्य, अन्य विभागाध्यक्ष तथा शिक्षकगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, स्वयंसेवकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का सफलतापूर्वक मंच संचालन बी.टेक की छात्राओं द्वारा किया गया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त किया।