देहरादून।
समावेशी विकास और समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान, देहरादून एवं न्यायालय आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘सुगम्य यात्रा’ का शुभारंभ किया गया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए समाज में सुगमता एवं सुलभता सुनिश्चित करना तथा जनसामान्य को दिव्यांगजनों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं जागरूक बनाना है।
इस अवसर पर आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तराखंड श्री गौरव कुमार एवं संस्थान के निदेशक, इंजी. मनीष वर्मा ने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान परिसर से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
आयुक्त श्री गौरव कुमार ने दिव्यांगजनों से सरकारी भवनों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों की सुगमता से जुड़े अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया। संस्थान के निदेशक, इंजी. मनीष वर्मा ने कहा, “यह यात्रा न केवल जागरूकता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह दिव्यांगजनों के लिए एक समान और सुगम वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।”
इस अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा दिव्यांगजन संघ (APD) के सहयोग से शुरू की गई YesToAccess ऐप को डाउनलोड किया गया। इस महत्वपूर्ण ऐप के माध्यम से कोई भी दिव्यांगजन या आम नागरिक सार्वजनिक स्थलों और सरकारी भवनों की सुगमता एवं सुलभता का आकलन कर सकता है।
अपने फ़ोन के कैमरे का उपयोग करके किसी संरचना की तस्वीर लेने पर, उपयोगकर्ता रैंप, रेलिंग, सुलभ शौचालय, स्पर्शनीय मार्ग और स्पष्ट संकेत जैसी सुविधाओं का विश्लेषण कर सकते हैं। साथ ही, वे अपने सुझाव और प्रतिक्रियाएँ भी इस ऐप पर साझा कर सकते हैं।
इस यात्रा में संस्थान के दृष्टि दिव्यांगजनों, आदर्श विद्यालय के छात्र-छात्राओं, संस्थान के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में योगदान दिया।
‘सुगम्य यात्रा’ का उद्देश्य :
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निर्देशानुसार, यह यात्रा देशभर में आयोजित की जा रही है। इस यात्रा के तहत, विभाग द्वारा लॉन्च की गई YesToAccess ऐप के माध्यम से दिव्यांगजन शासकीय भवनों, नगर निकाय कार्यालयों, पर्यटन स्थलों, पुस्तकालयों, हॉल आदि का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुगमता एवं सुलभता का निरीक्षण करेंगे।
इस यात्रा का उद्देश्य न केवल इन सार्वजनिक स्थलों की भौतिक पहुंच का आकलन करना है, बल्कि दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों एवं उनके लिए उपलब्ध सुगमता और सुविधाओं के प्रति जागरूक करना भी है।