देहरादून, अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की मंगलकामना का पावन पर्व करवा चौथ आज देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं सौहार्द बनाए रखने की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी। दिनभर उपवास रखने के बाद महिलाएं सायंकाल विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर करवा माता की कथा सुनेंगी और चंद्रदेव के दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करेंगी।
भगवान शिव-पार्वती और करवा माता की होगी आराधना
सनातन धर्म में करवा चौथ का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में सुहागिन महिलाएं माता पार्वती से अपने सुहाग की रक्षा, पति के उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करेंगी।
परंपरा के अनुसार, महिलाएं प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेंगी। इसके बाद दिनभर निर्जला उपवास रखकर सायंकाल पूजा की तैयारी करेंगी। पूजन के दौरान करवा माता की कथा श्रवण कर परिवार में सुख-शांति, प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की कामना की जाएगी।
चंद्रदेव को अर्घ्य देकर करेंगी व्रत का पारण
करवा चौथ की पूजा में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रदेव के दर्शन करेंगी, उन्हें अर्घ्य अर्पित करेंगी और पति की दीर्घायु एवं सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करेंगी। इसके पश्चात पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाएगा। चंद्रोदय का समय अलग-अलग स्थानों पर भिन्न हो सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
संकष्टी चतुर्थी के संयोग से गणेश पूजन का विशेष महत्व
इस बार करवा चौथ के साथ संकष्टी चतुर्थी का संयोग होने से भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक गणेश पूजन करने से जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित कर परिवार की उन्नति एवं मंगलमय जीवन की कामना करेंगे।
बाजारों में छाई रौनक, शृंगार सामग्री की खरीदारी
करवा चौथ को लेकर बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिलेगी। पूजा की थाली, करवा, छलनी, दीपक, वस्त्र और शृंगार सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की चहल-पहल रहेगी। मेहंदी लगवाने और पारंपरिक वेशभूषा में सजने-संवरने को लेकर भी महिलाओं में खास उत्साह रहेगा। घरों में पूजा की तैयारियां की जाएंगी और परिवार के सदस्य भी इस पावन पर्व को लेकर उत्साहित रहेंगे।
प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है करवा चौथ
करवा चौथ केवल उपवास और पूजा-अर्चना तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और आपसी सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ करता है। भारतीय संस्कृति में दांपत्य जीवन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और करवा चौथ इसी पारिवारिक परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व परिवार में मंगलकामना, आत्मीयता और सुख-समृद्धि का संदेश देता है।