सिडकुल स्थित दवा फैक्ट्री के कार्यालय पर रखी लाखों की नकदी पर चोरों ने हाथ साफ

रुद्रपुर। सिडकुल स्थित दवा फैक्ट्री के कार्यालय पर रखी लाखों की नकदी पर चोरों ने हाथ साफ लिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस कुछ संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। साथ ही पुलिस टीम मामले में आसपास के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है।
पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री प्रबंधक द्वारा फैक्ट्री में चोरी होने की सूचना मिली थी। जानकारी के दौरान पता चला है की शनिवार सुबह कर्मचारी सुरेंद्र कुमार दफ्तर पहुंचे तो कार्यालय का मुख्य दरवाजा टूटा हुआ था।जिसकी सूचना उसके द्वारा मालिक राजेंद्र तुलशियाल को दी गई। मौके पर पहुंचे फैक्ट्री मालिक जब केबिन में पहुंचे तो गल्ला टूटा हुआ मिला और गल्ले में रखी लाखों रुपए की नकदी गायब थी। आसपास लगे सीसीटीवी के तार भी कटे हुए थे। चौकी इंचार्ज मुकेश मिश्रा ने बताया कि आशंका जताई जा रही है चोर ने फैक्ट्री की छत से अंदर घुसकर घटना को अंजाम दिया होगा। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस टीम मामले में आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कथा समाचार एक मज़ेदार हिंदी न्यूज़ पोर्टल जैसा दिखता है, जिसमें उत्तराखंड, देहरादून, पॉलिटिक्स, हेल्थ, एजुकेशन, कल्चर, न्यूज़ और पॉपुलर इवेंट्स पर कंटेंट होता है। यह फ़ॉर्मेट आसान है क्योंकि इसमें लोकल न्यूज़, सोशल इशू और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए प्रैक्टिकल जानकारी शामिल होती है। इसलिए, सिक्योर डिजिटल पेमेंट का टॉपिक यहाँ अपने आप फिट बैठता है: ऑनलाइन सर्विस लंबे समय से रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा रही हैं। जब ऑनलाइन शॉपिंग की बात आती है, तो हर कोई तुरंत कार्ड डिटेल्स नहीं डालना चाहता। एक आसान ऑप्शन मोबाइल फ़ोन बिल के ज़रिए पेमेंट करना है, जहाँ अमाउंट ऑपरेटर के अकाउंट में ऐड हो जाता है या प्रीपेड बैलेंस से डेबिट हो जाता है। जो लोग लिमिट, SMS या डिवाइस कन्फर्मेशन और छोटे खर्च कंट्रोल से परिचित हैं, उनके लिए AustriaWin24.atपर प्रैक्टिकल डिटेल्स देखना फायदेमंद है। यह तरीका खासकर छोटे डिजिटल पेमेंट, सब्सक्रिप्शन और उन सर्विस के लिए दिलचस्प है जहाँ स्पीड, सिंप्लिसिटी और बैंक डेटा ट्रांसफर की कमी ज़रूरी है। आसानी का मतलब यह नहीं है कि ध्यान देने की ज़रूरत है: मोबाइल पेमेंट में आमतौर पर डेली और मंथली लिमिट, पोटेंशियल फीस और आपके बिल पर चार्ज दिखाने में देरी होती है। इसलिए, कथात समाचार के रीडर्स, जो करंट न्यूज़ और हेल्पफुल एक्सप्लेनेशन से अप-टू-डेट रहने के आदी हैं, उनके लिए यह टॉपिक लोकल एजेंडा और मॉडर्न फाइनेंशियल आदतों, दोनों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।