देहरादून,
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में बुधवार को नवम दीक्षांत समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम उपस्थित रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय मंत्री, शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता डॉ. धन सिंह रावत तथा सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आईएएस उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर द्वारा की गई।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति सहित समस्त अतिथियों द्वारा वीर माधो सिंह भंडारी की प्रतिमा एवं ‘शौर्य दीवार’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में गंगा महिला छात्रावास का लोकार्पण माननीय अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
शोभा यात्रा के उपरांत विश्वविद्यालय सभागार में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत एवं कुलगीत की प्रस्तुति के साथ समारोह का विधिवत शुभारम्भ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंगलाचरण के पश्चात कार्यक्रम औपचारिक रूप से आरम्भ किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर द्वारा माननीय अतिथियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न (प्लांटर) भेंट कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। साथ ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से पधारे कुलपतिगणों का भी हृदय से स्वागत किया गया।
कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति, उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अवगत कराया कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है तथा समाजोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्यरत है।
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024–2025 के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के कुल 5141 शिक्षार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 14 स्वर्ण, 12 रजत एवं 11 कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 14 शोधार्थियों को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई।
कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर द्वारा अवगत कराया गया कि इस सत्र 2024–25 में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत बी.टेक. के 2455, बी.आर्क. के 12, बी.ए.एल.एल.बी. के 102, बी.बी.ए.एल.एल.बी. के 21, बी.एच.एम.सी.टी. के 102, बी.फार्मा के 633 तथा एल.एल.बी. के 257, इस प्रकार कुल 3582 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई।
कुलपति द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय के सभी छह परिसर संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में ‘एआई लिटरेसी मिशन’ का शुभारम्भ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब की स्थापना तथा स्वच्छता एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु ‘EVORA App’ के विकास की भी घोषणा की गई।
समारोह में माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा सभी उपाधियों को डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल रूप से हस्तांतरित किया गया।
अपने संबोधन में सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आईएएस ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान एवं मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उन्होंने तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स एवं डेटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों में दक्षता विकसित करने पर बल दिया तथा कहा कि शिक्षा एक निरंतर सीखने की प्रक्रिया है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण एवं सपनों की प्राप्ति का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया तथा नारी शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया।
आज प्राप्त की गई यह उपाधि आपके जीवन में नई जिम्मेदारियों एवं अवसरों के द्वार खोलती है। आप अपने ज्ञान, कौशल एवं मूल्यों का सदुपयोग करते हुए न केवल अपने व्यक्तिगत विकास को सुदृढ़ करें, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में भी सक्रिय योगदान दें।
उन्होंने नारी शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि नारीशक्ति आज प्रत्येक क्षेत्र में सशक्त रूप से अग्रसर है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने अपने उद्बोधन में महान योद्धा वीर माधो सिंह भंडारी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन साहस, तकनीकी दक्षता एवं समाज सेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों को “नौकरी खोजने वाले” नहीं, बल्कि “नौकरी सृजन करने वाले” बनने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि आज का युवा भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नारीशक्ति के सशक्त योगदान की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं ने इस क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज की युवा पीढ़ी ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘अमृत पीढ़ी’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए सतत प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे ऊर्जावान प्रदेश की सकारात्मकता सदैव उनके साथ रहेगी और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति एवं कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर के नेतृत्व की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि युवा पीढ़ी ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर द्वारा माननीय राज्यपाल एवं सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृतिचिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया । विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल महोदय सहित सभी विशिष्ट अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा उनके मार्गदर्शन की अपेक्षा व्यक्त की। समारोह में प्रोफ. एन.के. जोशी जी, कुलपति, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, टिहरी गढ़वाल, प्रोफ. सुरेखा डंगवाल जी, कुलपति, दून विश्वविद्यालय, देहरादून, प्रोफ. प्रवेन्द्र कौशल जी, कुलपति, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय हॉटीकल्चर एण्ड फॉरेस्टी, भरसार, पौड़ी गढ़वाल, प्रोफ. मनमोहन सिंह चौहान जी, कुलपति, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर एवं तकनीकी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद्, विद्या परिषद्, वित्त समिति तथा परीक्षा समिति के सदस्यगण, अधिकारीगण, शिक्षकगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अंत में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर विश्वविद्यालय एवं प्रदेश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।
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